गुजरात का सहकारी मॉडल अब केवल आर्थिक विकास का माध्यम नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल बन चुका है। राज्य की हजारों ग्रामीण महिलाएं अब इस मॉडल के जरिए आत्मनिर्भर बन रही हैं। सहकारी समितियों के माध्यम से महिलाएं न केवल दूध उत्पादन और विपणन में भागीदार बनी हैं, बल्कि अब वे प्रबंधन और नेतृत्व की भूमिकाएं भी निभा रही हैं।
गुजरात के डेयरी सहकारी क्षेत्र ने विशेष रूप से अमूल ब्रांड के जरिए देशभर में अपनी पहचान बनाई है। आज ये महिलाएं हर साल 9000 करोड़ रुपये से अधिक की आमदनी कमा रही हैं, जिससे उनके जीवन स्तर में जबरदस्त सुधार आया है।
इस मॉडल की खासियत है– “महिलाओं की भागीदारी, पारदर्शिता और स्थानीय नेतृत्व।”इससे न केवल आर्थिक लाभ हो रहा है, बल्कि सामाजिक बदलाव भी देखने को मिल रहा है। महिलाएं अब परिवार और समाज में निर्णय लेने की स्थिति में हैं।
गुजरात का यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणा है कि कैसे सहकारिता और महिला शक्ति मिलकर विकास का नया अध्याय लिख सकती हैं।

