पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU) ने एक और सराहनीय कदम उठाया है। विश्वविद्यालय के NIDHI-TBI प्रोजेक्ट और स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज़ (SBS) ने नवांशहर जिले के गांव नौरा के दो उभरते हुए उद्यमियों –दिलबाग सिंह पबला और श्रीमती रेशम कौर पबला – को मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग प्रदान किया है। यह दंपति पारंपरिक तरीके से गुड़ और गुड़ पाउडर तैयार करता है और अब अपने व्यवसाय को अगली मंजिल तक पहुंचाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है।
अपने व्यवसाय को विस्तार देने के साथ-साथ यह जोड़ा समाज को कुछ लौटाने की भावना से प्रेरित है। वे ग्रामीण युवाओं को रोजगार देना और लोगों को साफ-सुथरा, उच्च गुणवत्ता वाला गुड़ उपलब्ध कराना चाहते हैं।PAU के NIDHI-TBI प्रोजेक्ट और स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज़ की टीम ने प्रोसेसिंग एंड फूड इंजीनियरिंग विभाग के विशेषज्ञों के साथ मिलकर एक विस्तृत मार्गदर्शन सत्र का आयोजन किया, जिसमें उद्यमिता, तकनीकी सुधार और ब्रांडिंग जैसे विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
इस अवसर पर डॉ. रमंदीप सिंह, प्रोजेक्ट के प्रमुख अन्वेषक और SBS के निदेशक ने पबला दंपति की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे स्थानीय प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने उद्यमियों को सलाह दी कि वे PAU से प्रशिक्षित अन्य गुड़ उत्पादकों से भी सीख लें, जो पंजाब के विभिन्न हिस्सों में सफलतापूर्वक आधुनिक तकनीकों के साथ अपने पारंपरिक व्यवसाय को चला रहे हैं।
प्रोजेक्ट मैनेजमेंट की विशेषज्ञता रखते हुए डॉ. बबीता कुमार ने व्यापार को बढ़ाने के लिए स्पष्ट उद्देश्य, समयसीमा, बजट और दायरे के अनुसार योजना बनाने और उसे अनुशासित रूप से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।
तकनीकी पक्ष को संभालते हुए डॉ. तरसेम चंद मित्तल, प्रमुख विस्तार वैज्ञानिक व प्रोसेसिंग एंड फूड इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष ने गुड़ निर्माण के लिए उपयुक्त मशीनरी और आधुनिक तकनीकों के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
वहीं डॉ. पूनम ए. सचदेव, सह-अन्वेषक और प्रमुख खाद्य तकनीकी विशेषज्ञ ने कहा कि ऐसे संवादात्मक सत्र नए उद्यमियों को एक स्पष्ट दिशा प्रदान करते हैं और उन्हें व्यावसायिक दृष्टिकोण से सशक्त बनाते हैं।
PAU की टीम ने ब्रांडिंग, पैकेजिंग और लेबलिंग जैसे जरूरी क्षेत्रों में भी पबला दंपति को आगे सहयोग देने का आश्वासन दिया, जिससे उनका उत्पाद बाजार में प्रभावी रूप से प्रतिस्पर्धा कर सके। ग्रामीण क्षेत्र में नवाचार और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय से पीएयू ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि सही मार्गदर्शन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ गांवों से भी सफल उद्योगों की नींव रखी जा सकती है। यह पहल न केवल स्थानीय प्रतिभा को सशक्त बना रही है, बल्कि पंजाब की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे रही है।

