केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने जम्मू-कश्मीर दौरे के दौरान शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कश्मीर (SKUAST-K), शालीमार परिसर में बागवानी अनुसंधान और प्रदर्शन ब्लॉकों का निरीक्षण किया। इस अवसर पर उन्होंने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के हितधारकों से विस्तृत संवाद भी किया।अपने दौरे के दौरान मंत्री को घाटी में बागवानी के क्षेत्र में हो रहे वैज्ञानिक नवाचारों की जानकारी दी गई। उन्होंने एक ऐसी उन्नत किस्म के सेब का निरीक्षण किया जो रोपण के पहले वर्ष में ही फल देने लगता है, जिससे बागवानी उत्पादन की प्रतीक्षा अवधि काफी कम हो जाती है।
इसके अलावा, उन्होंने ओलावृष्टि से बचाव के लिए उपयोग में लाए जा रहे सुरक्षात्मक नेट, वैज्ञानिक छंटाई तकनीकें, और जल व पोषक तत्व प्रबंधन की प्रभावशाली विधियों का भी अवलोकन किया। इन आधुनिक तरीकों को अपनाने वाले किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इससे उत्पादन और आय दोनों में स्थायित्व आया है।केंद्रीय कृषि मंत्री ने SKUAST-K के छात्रों से भी संवाद किया, जिन्होंने सेब, खुबानी, अखरोट, बादाम और जामुन जैसे फलों के साथ-साथ छह माह तक सुरक्षित रखे गए कोल्ड स्टोरेज सेब जैसे नवाचार प्रदर्शित किए। मंत्री ने छात्रों के प्रयासों की सराहना की और विश्वविद्यालय को कृषि नवाचार का उभरता हुआ केंद्र बताया।
बाद में, केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसानों, मधुमक्खी पालकों, कोल्ड स्टोरेज संचालकों और नर्सरी ऑपरेटरों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ बैठक की। इस संवाद में उन्होंने उनकी समस्याओं और सुझावों को गंभीरता से सुना। हितधारकों ने सरकार की विभिन्न किसान-हितैषी योजनाओं की सराहना की और ‘विकसित जम्मू-कश्मीर’ की प्रधानमंत्री की परिकल्पना को समर्थन दिया।
बैठक में केसर उत्पादकों ने सिंचाई की बेहतर सुविधाओं और 128 बोरवेल्स के समुचित उपयोग की मांग की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए गुणवत्तापूर्ण उत्पादन हेतु शोध और संस्थागत सहायता की आवश्यकता जताई। मधुमक्खी पालकों ने बीमा योजना, सस्ती ऋण सुविधा और कीटनाशकों के दुष्प्रभाव को नियंत्रित करने की मांग रखी। सेब उत्पादकों ने जलवायु परिवर्तन, ओलावृष्टि और वैश्विक तापमान के कारण हो रहे नुकसान पर चिंता जताई और सस्ते दामों पर गुणवत्तापूर्ण इनपुट की उपलब्धता की मांग की।
कोल्ड स्टोरेज संचालकों ने फसल बीमा और उचित न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग के साथ-साथ हिमाचल और उत्तराखंड के समान सब्सिडी और मूल्य स्थिरता की आवश्यकता जताई। वहीं, नर्सरी ऑपरेटरों ने पौध सामग्री के देशभर में समयबद्ध और किफायती परिवहन हेतु विशेष रेलवे नीति की मांग की।
जवाब में मंत्री केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों से सीधा संवाद सेवा का माध्यम है, और कृषि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। उन्होंने कहा कि सरकार “बीज से बाजार तक” किसानों के साथ खड़ी है और आय वृद्धि को नीति का प्रमुख लक्ष्य मानती है।
उन्होंने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वैज्ञानिकों को अब अधिक समय खेतों में बिताने का निर्देश दिया गया है ताकि वे किसानों की समस्याओं को जमीनी स्तर पर समझ सकें। उन्होंने क्लीन प्लांट सेंटर्स की स्थापना, निजी नर्सरियों को सब्सिडी समर्थन, और HADPL के माध्यम से बागवानी और प्रसंस्करण को प्रोत्साहन देने की घोषणा की।
मंत्री ने जम्मू-कश्मीर को बागवानी का वैश्विक केंद्र बनाने की योजना को रेखांकित करते हुए बताया कि आयात पर निर्भरता घटाने, प्रतिस्पर्धी शुल्क नीति, निर्यात ढांचे का विकास, और रेलवे कनेक्टिविटी जैसे उपायों पर काम किया जा रहा है।
उन्होंने कीटनाशकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, सस्ती दरों पर उपलब्धता सुनिश्चित करने और घटिया उत्पाद बेचने वालों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की घोषणा की। साथ ही, किसानों को लाभ का बड़ा हिस्सा सुनिश्चित करने हेतु मूल्य निर्धारण संरचना पर जोर दिया।
समापन में मंत्री ने कहा कि किसान कल्याण के लिए वे सदैव समर्पित हैं और उनका मोबाइल सभी किसानों के लिए सदैव खुला है। उन्होंने कहा कि सच्ची जनसेवा वहीं है जो किसानों के जीवन से जुड़ी हो।
यह दौरा केंद्र सरकार की कृषि क्षेत्र को सशक्त, टिकाऊ और समावेशी विकास की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

