महाराष्ट्र विधानसभा में बुधवार को सोयाबीन खरीद में अनियमितताओं और किसानों को भुगतान में देरी के मुद्दे पर जबरदस्त हंगामा हुआ। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम नहीं मिल रहा है। इस पर सरकार की ओर से जवाब मिलने के बाद विपक्ष ने विरोध स्वरूप सदन से वॉकआउट कर दिया।
कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि राज्य में हजारों किसानों को सोयाबीन की बिक्री के बावजूद भुगतान नहीं किया गया है। उन्होंने सरकार पर किसानों के साथ धोखा करने का आरोप लगाया।
इस पर जवाब देते हुए सहकारिता और मार्केटिंग मंत्री जयकुमार रावल ने कहा कि इस साल राज्य में रिकॉर्ड स्तर पर सोयाबीन की खरीद की गई है। रावल ने सदन में जानकारी दी कि 562 खरीद केंद्रों पर 51 हजार से अधिक किसानों से सोयाबीन खरीदा गया और उनके खातों में सीधे 5,500 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं।
हालांकि, अकोला जिले के बालापुर तालुका से जुड़ी एक घटना पर विवाद खड़ा हो गया। मंत्री रावल ने बताया कि ‘अंदुरा शेतकरी कंपनी’ नाम की किसान संस्था ने रिकॉर्ड में रजिस्टर्ड होने के बावजूद 1,297 क्विंटल सोयाबीन की डिलीवरी गोदाम में नहीं की। इस मामले में संस्था के प्रमुख के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है और फिलहाल 36 लाख रुपये की राशि रोकी गई है। जांच जारी है और प्रभावित किसानों को भुगतान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
विधायक दौलत दरोदा द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने के बाद हेमंत ओगले, रणधीर सावरकर, नाना पटोले, रोहित पवार, कैलास पाटिल और जयंत पाटिल सहित अन्य नेताओं ने भी सवाल किए। मंत्री के उत्तर से असंतुष्ट विपक्षी सदस्य सदन से बाहर चले गए।
इससे पहले भी मंत्री रावल ने जानकारी दी थी कि महाराष्ट्र ने देश में सबसे ज्यादा सोयाबीन खरीदी है। उन्होंने बताया कि 7 लाख 64 हजार 731 रजिस्टर्ड किसानों में से 3 लाख 69 हजार 114 किसानों से 7 लाख 81 हजार 447 मीट्रिक टन सोयाबीन की खरीद की गई है। महाराष्ट्र ने इस मामले में मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक और तेलंगाना को पीछे छोड़ दिया है।
मीडिया से बात करते हुए मंत्री रावल ने कहा कि खरीद प्रक्रिया को तेज किया गया है और किसानों के खातों में दो से तीन दिन के भीतर भुगतान पहुंचे, इसके लिए सिस्टम को निर्देश दिए गए हैं। कई जिलों ने अपना लक्ष्य पहले ही पूरा कर लिया है।
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