उत्तर-पूर्व भारत में शीतोष्ण बागवानी (Temperate Horticulture) को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से आईसीएआर-केंद्रीय शीतोष्ण बागवानी संस्थान (ICAR-CITH) और प्रमुख एग्री-टेक्नोलॉजी कंपनी QUL Fruits Pvt. Ltd. के बीच एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत की गई है। यह पहल अरुणाचल प्रदेश के डिरांग स्थित ICAR-CITH के क्षेत्रीय केंद्र में आयोजित एक किसान-केंद्रित कार्यक्रम के माध्यम से औपचारिक रूप से लॉन्च की गई।
कश्मीर मॉडल से प्रेरित होगी उत्तर-पूर्व की बागवानी
संस्थान की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, इस सहयोग का उद्देश्य सेब, कीवी और पर्सिमन जैसी उच्च मूल्य वाली शीतोष्ण फसलों को उत्तर-पूर्वी राज्यों की मुख्यधारा कृषि में शामिल करना है। यह कार्य कश्मीर घाटी के सफल मॉडलों और सिद्ध तकनीकों के माध्यम से किया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय किसानों को बताया गया कि कश्मीर में सेब की खेती में हुए तकनीकी सुधारों ने कैसे बागवानी क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाए हैं, और यही बदलाव अब अरुणाचल प्रदेश सहित अन्य पहाड़ी राज्यों में भी संभव हैं।
QUL Fruits ने “QUL गाह” केंद्र की घोषणा की
QUL Fruits Pvt. Ltd. ने इस अवसर पर “QUL गाह” नामक एक समर्पित एक्सटेंशन और इंटरेक्शन सेंटर खोलने की घोषणा की, जो किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी और कश्मीर के किसानों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने का अवसर देगा। यह केंद्र तकनीक के आदान-प्रदान, सर्वोत्तम कृषि पद्धतियों की साझा जानकारी और नियमित प्रशिक्षण सत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनेगा।
कंपनी ने यह भी घोषणा की कि अरुणाचल प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों के चयनित किसान समूहों को कश्मीर भेजा जाएगा, ताकि वे शीतोष्ण बागवानी की आधुनिक तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से देखें और सीखें।
वरिष्ठ वैज्ञानिकों और किसानों की भागीदारी
कार्यक्रम में ICAR-CITH डिरांग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जावेद आई.एम., डॉ. प्रदीप कुमार एन (सब्जी विज्ञान), डॉ. सुप्रीथा बी.जी (फल विज्ञान), डिरांग और आसपास के किसान समूहों, तथा QUL Fruits Pvt. Ltd. के नॉर्थ ईस्ट रीजन प्रमुख जुनैद ने भाग लिया।
भविष्य की दिशा
यह साझेदारी उत्तर-पूर्व के पर्वतीय क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने, कृषि आधारित आजीविका को सशक्त बनाने, और कृषकों को उच्च लाभ वाली फसलों की ओर उन्मुख करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। यह पहल न केवल क्षेत्र की जलवायु और भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखकर विकसित की गई है, बल्कि स्थानीय कृषकों को राष्ट्रीय बागवानी परिदृश्य से जोड़ने का अवसर भी प्रदान करती है। यह नवाचार आधारित गठजोड़ उत्तर-पूर्व भारत में हरित क्रांति के नए युग की नींव रखने की ओर एक मजबूत प्रयास है।

