धरती की जन्नत कहे जाने वाले कश्मीर में राष्ट्रीय कीटविज्ञान एवं उभरती एग्रो-प्रौद्योगिकी कांग्रेस (NCEEA-2025) का तीन दिवसीय सम्मेलन रविवार को संपन्न हुआ। इस अवसर पर भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में टिकाऊ कृषि के लिए एक व्यापक कार्ययोजना प्रस्तुत की गई।
यह आयोजन 27 से 29 जून तक चला, जिसमें देशभर से 115 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य पर्यावरण हितैषी कीट प्रबंधन, जलवायु-लचीली कृषि, और क्षेत्रीय एग्रो-प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना था। यह कार्यक्रम SKUAST जम्मू, आईआईटी जम्मू और एन्टोमोलॉजिकल साइंस अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ।
स्वदेशी कृषि को प्रोत्साहन की अपील
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आईसीएआर, नई दिल्ली की एडीजी (प्लांट प्रोटेक्शन एंड बायोसेफ्टी) श्रीमती पूनम जसरोतिया ने वर्चुअल माध्यम से कहा कि पहाड़ी कृषि को सशक्त करने के लिए क्षेत्रीय नवाचारों की आवश्यकता है। उन्होंने अनारदाना, कसरोड, कलाड़ी, आलू और लघु फलों जैसी स्थानीय फसलों की संभावनाओं को उजागर किया और सटीक खेती, कीट निगरानी और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने की बात कही।
प्रमुख सिफारिशें
प्रतिभागियों ने सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिनमें शामिल हैं:
- स्थानीय जैव एजेंटों के माध्यम से जैविक कीट नियंत्रण को बढ़ावा देना।
- एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) को व्यापक रूप से अपनाना।
- कीटविज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), जीनोमिक्स और जैव प्रौद्योगिकी का समावेश।
- तनाव सहनशील फसलों के विकास के लिए जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान को प्रोत्साहन।
- नवीकरणीय ऊर्जा आधारित नियंत्रित वातावरण कृषि (CEA) को समर्थन।
- रांबन जैसे जिलों के लिए स्थान-विशिष्ट कृषि समाधान तैयार करना।
- फसल कटाई के बाद मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना और
- विदेशी कीटों व जैविक खतरों से निपटने के उपाय।
सम्मेलन में कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार कार्यक्रमों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) से जोड़ने और युवाओं के लिए रोजगार उन्मुख नवाचारों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।
सहयोग व समर्पण की भावना
एन्टोमोलॉजिकल साइंस अकादमी के अध्यक्ष श्री राकेश कुमार गुप्ता ने अपने संबोधन में जम्मू-कश्मीर और देशभर में टिकाऊ और तकनीक आधारित कृषि विकास की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने SKUAST जम्मू के कुलपति और प्रशासनिक अधिकारियों का आभार जताया।
इसके साथ ही रांबन के उपायुक्त मोहम्मद एलियास खान की उपस्थिति और जिला प्रशासन के सहयोग के लिए भी धन्यवाद व्यक्त किया गया। आयोजन स्थल पीवाई रिसॉर्ट्स, संसार के आतिथ्य और व्यवस्थाओं की भी सराहना की गई।
इस सम्मेलन का समापन स्थानीय नवाचारों, नीति आधारित पहल और समावेशी सहयोग के माध्यम से भारतीय कृषि को रूपांतरित करने के साझा दृष्टिकोण के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति जताई कि यदि किसानों, वैज्ञानिकों और उद्योगों के बीच समन्वय को मजबूत किया जाए, तो आगामी पीढ़ियों के लिए टिकाऊ और समृद्ध कृषि व्यवस्था का निर्माण संभव है।

