भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अनुमान जताया है कि जुलाई 2025 में देश में सामान्य से अधिक वर्षा हो सकती है, जिससे कृषि गतिविधियों को मजबूती मिलेगी और व्यापक अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने सोमवार को एक वर्चुअल संवाददाता सम्मेलन में बताया, “जुलाई 2025 में देशभर में औसत वर्षा 106% से अधिक रहने की संभावना है, जो लंबे समय के औसत से अधिक है।”
जुलाई के लिए ऐतिहासिक औसत वर्षा
IMD के अनुसार, जुलाई के लिए दीर्घकालिक औसत वर्षा 280.4 मिमी है, जिसे 1971 से 2020 तक के आंकड़ों के आधार पर तय किया गया है।
मॉनसून के लिए अनुकूल स्थितियाँ
वर्तमान में प्रशांत महासागर में एल नीनो-सदर्न ऑसीलेशन (ENSO) की तटस्थ स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग के मॉनसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) और अन्य मॉडल इस बात का संकेत दे रहे हैं कि यह तटस्थ स्थिति मानसून सीजन के बाकी समय तक बनी रह सकती है। ENSO की स्थिति आमतौर पर भारत में मानसून की गतिविधियों को प्रभावित करती है।
जून में वर्षा सामान्य से अधिक
IMD के आंकड़ों के मुताबिक, जून 2025 में भारत में 180 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य 165.3 मिमी से अधिक है। यह आंकड़ा 1901 से अब तक का 41वां सबसे अधिक और 2001 के बाद का 9वां सबसे अधिक वर्षा वाला जून रहा।
उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पूर्वोत्तर और हिमालय की तराई क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा हुई।
खेती में दिखने लगे असर
सकारात्मक मॉनसून संकेतों का असर खेती में दिखने लगा है। 27 जून तक देशभर में खरीफ फसलों का कुल रकबा 262.1 लाख हेक्टेयर तक पहुँच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 235.4 लाख हेक्टेयर की तुलना में लगभग 11.3% अधिक है।
- धान की बुवाई में 47% की बढ़ोतरी के साथ 35 लाख हेक्टेयर में रोपाई की गई है।
- दलहन फसलों का रकबा 53 लाख हेक्टेयर रहा, जो 37% अधिक है।
- तेलहन फसलें9 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 20% अधिक है।
क्षेत्रों के अनुसार वर्षा का पूर्वानुमान
IMD ने चेतावनी दी है कि हालांकि अधिकांश भागों में सामान्य से अधिक वर्षा होगी, पूर्वोत्तर, पूर्वी भारत, दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों और उत्तर-पश्चिम भारत के सीमित क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। वहीं, अधिकतम तापमान अधिकतर स्थानों पर सामान्य से कम रहने की संभावना है, हालांकि पूर्वोत्तर और दक्षिण के कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है।
अर्थव्यवस्था को राहत, महंगाई में कमी
अच्छी बारिश से फसलों की पैदावार बढ़ने की उम्मीद है, जिससे खाद्य आपूर्ति बेहतर होगी और महंगाई पर नियंत्रण रखा जा सकेगा। मई 2025 में देश की खुदरा महंगाई दर घटकर 2.82% रही, जो पिछले महीने 3.16% और मई 2023 में 4.8% थी। वहीं, खाद्य महंगाई घटकर 0.99% रही।
संभावित खतरे भी मौजूद
IMD ने आगाह किया कि अधिक वर्षा से बाढ़, भूस्खलन, यातायात में बाधा, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और पारिस्थितिकी को नुकसान जैसे जोखिम हो सकते हैं। इन जोखिमों से निपटने के लिए मौसम विभाग ने सलाह दी है कि बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाए, चेतावनी प्रणाली का बेहतर उपयोग हो, निगरानी और संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा दिया जाए और संवेदनशील क्षेत्रों के लिए प्रभावी प्रतिक्रिया योजना तैयार की जाए।
जुलाई में होने वाली अधिक वर्षा से खेती, जल संसाधन और आर्थिक गतिविधियों को बल मिलने की पूरी संभावना है, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि संबंधित विभाग संभावित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की पूरी तैयारी रखें, ताकि अधिक वर्षा का लाभ सुरक्षित रूप से समाज तक पहुँचे।

