कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तर प्रदेश के रामपुर ज़िले में किसानों से सीधा संवाद किया। ‘चौपाल पर चर्चा‘ नामक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने किसानों की समस्याएं सुनीं, उनकी ज़रूरतों को समझा और कई अहम घोषणाएं भी कीं। इस अवसर पर उन्होंने कृषि अनुसंधान, निर्यात नीति, मृदा जांच और किसानों की भलाई से जुड़े अनेक विषयों पर अपनी बात रखी।
चावल पर निर्यात प्रतिबंध समाप्त, एमईपी भी खत्म
केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि चावल पर लगे निर्यात प्रतिबंध को हटा दिया गया है, जिससे किसान अब वैश्विक बाज़ारों में अपनी फसल को बेहतर दामों पर बेच सकेंगे। इसके साथ ही न्यूनतम निर्यात मूल्य (MEP) की शर्त को भी हटा दिया गया है, जिससे छोटे और मध्यम किसानों को भी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुंच मिलेगी।
मृदा स्वास्थ्य जांच को मिलेगी तकनीकी ताकत
किसानों द्वारा मृदा की गुणवत्ता जांच के लिए प्रयोगशालाएं गांव स्तर पर बनाए जाने की मांग पर उन्होंने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अब सरकार आधुनिक मृदा परीक्षण तकनीकों को बढ़ावा देगी, जिनसे सिर्फ 15 मिनट में जांच के परिणाम मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे उपकरणों को किसानों तक पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
किसानों की समस्याओं पर अनुसंधान आधारित समाधान
केंद्रीय कृषि मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अब कृषि अनुसंधान फील्ड आधारित होगा, यानी किसानों की जरूरतों और चुनौतियों को ध्यान में रखकर तकनीकी समाधान विकसित किए जाएंगे। उन्होंने धान की 1509 किस्म में रोग की समस्या को गंभीरता से लेते हुए वैज्ञानिकों को निर्देश दिए कि रोग प्रतिरोधी और अधिक उपज देने वाली किस्में तैयार की जाएं।
कीटनाशकों और उर्वरकों की गुणवत्ता होगी नियंत्रित
कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने उर्वरकों और कीटनाशकों की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई। इस पर मंत्री ने भरोसा दिलाया कि मानक के अनुरूप न होने वाले खाद और कीटनाशकों पर सख्त कार्रवाई होगी, ताकि किसानों को किसी प्रकार की ठगी का शिकार न होना पड़े।
सप्ताह में दो दिन रहेंगे किसानों के बीच
केंद्रीय कृषि मंत्री ने यह घोषणा भी की कि वह हर सप्ताह दो दिन खेतों में जाकर किसानों से मिलेंगे और उनकी समस्याओं को सीधे समझेंगे। उन्होंने कहा, “नीतियां कागजों पर नहीं, खेतों की मिट्टी में बननी चाहिए।”
किसान बोले, सरकार की यह पहल स्वागतयोग्य
किसानों ने चौपाल पर चर्चा के दौरान सरकार के प्रयासों की सराहना की और सुझाव दिया कि सौर ऊर्जा योजनाओं को सरल बनाया जाए। इस पर मंत्री ने आश्वस्त किया कि सौर पैनल से जुड़ी योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।
यह संवाद कार्यक्रम कृषि मंत्रालय की उस नई पहल का हिस्सा है, जिसमें नीचे से ऊपर की नीति निर्माण प्रक्रिया को अपनाया जा रहा है, ताकि योजनाएं किसानों की वास्तविक जरूरतों के मुताबिक बनाई जा सकें।

