जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग ने कुछ मीडिया रिपोर्ट्स को गलत और भ्रामक करार दिया है, जिनमें यह दावा किया गया था कि भारत सरकार की एक नई योजना के तहत किसानों से सिंचाई जल के उपयोग के लिए शुल्क वसूला जाएगा।
मंत्रालय की स्पष्ट टिप्पणी
जल शक्ति मंत्रालय ने इस विषय में स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि जिस योजना का उल्लेख मीडिया में किया गया है, वह प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के अंतर्गत “आधुनिकीकरण कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन (M-CADWM) योजना” का एक पायलट प्रोजेक्ट है। इसका उद्देश्य जल उपयोग की दक्षता बढ़ाना, जल वितरण में पारदर्शिता लाना और आधुनिक तकनीकों जैसे प्रेसराइज पाइपलाइन, IoT डिवाइसेज़, और SCADA सिस्टम का उपयोग कर जल प्रबंधन को बेहतर बनाना है।मंत्रालय ने जोर देकर कहा है कि इस पायलट योजना में किसानों से जल उपयोग के लिए किसी प्रकार के शुल्क वसूलने का कोई प्रावधान नहीं है, न ही भारत सरकार की ओर से इस प्रकार का कोई निर्देश जारी किया गया है।
मंत्री की प्रेस वार्ता में हुआ था स्पष्टीकरण
हाल ही में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान माननीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने भी स्पष्ट किया था कि किसानों पर जल शुल्क लगाने का कोई इरादा नहीं है। इसके बावजूद कुछ मीडिया संस्थानों ने तथ्यों की अनदेखी करते हुए भ्रामक रिपोर्टें प्रकाशित कीं।
राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है निर्णय
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘कृषि’ और ‘जल’ दोनों विषय संविधान के अनुसार राज्य सूची में आते हैं। अतः यदि भविष्य में किसी राज्य द्वारा अपने स्तर पर जल उपयोगकर्ता समितियों (Water User Associations) से कोई शुल्क लिया जाता है, तो वह निर्णय संबंधित राज्य सरकार का अपना होगा, केंद्र सरकार का नहीं।
मीडिया से तथ्य-जांच की अपील
जल शक्ति मंत्रालय ने सभी मीडिया संस्थानों और हितधारकों से आग्रह किया है कि वे रिपोर्ट प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पुष्टि करें। बिना सत्यापन के इस प्रकार की भ्रामक सूचनाएं किसानों में अनावश्यक भय और असमंजस उत्पन्न कर सकती हैं।
यह स्पष्टीकरण पारदर्शिता बनाए रखने और कृषि समुदाय के बीच गलतफहमियों को रोकने के उद्देश्य से जारी किया गया है। सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और जल उपयोग को लेकर कोई आर्थिक बोझ उन पर नहीं डाला जाएगा।

