जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों का सतत और समावेशी विकास केवल योजनाओं के माध्यम से नहीं, बल्कि समुदाय की सक्रिय भागीदारी और सहानुभूतिपूर्ण शासन प्रणाली से ही संभव है। उन्होंने कहा कि ‘आदि कर्मयोगी बीटा संस्करण’ का शुभारंभ एक ऐसे प्रशासनिक तंत्र की ओर कदम है जो सुनता है, समझता है और बदलाव को साकार करता है।
यह विचार उन्होंने जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में व्यक्त किए, जहां उन्होंने ‘आदि कर्मयोगी बीटा संस्करण’ नामक प्रमुख कार्यक्रम का शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों को जन-केंद्रित और प्रेरणादायक दृष्टिकोण से प्रशिक्षित करने का उद्देश्य रखता है।
क्या है आदि कर्मयोगी बीटा संस्करण?
यह पहल लगभग एक लाख जनजातीय गांवों तक पहुंचने का लक्ष्य रखती है और इसके अंतर्गत लगभग 20 लाख हितधारकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इस प्रक्रिया को सशक्त बनाने के लिए 180 से अधिक राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर, 3,000 जिला स्तरीय प्रशिक्षक और 15,000 ब्लॉक स्तरीय ट्रेनरों का नेटवर्क तैयार किया गया है।
शासन में मानसिकता परिवर्तन की आवश्यकता
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्रालय के सचिव विभु नायर ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों की सोच में बदलाव लाना जरूरी है ताकि वे जनजातीय समुदायों की सेवा को अपने दायित्व के रूप में देखें। उन्होंने बहु-विभागीय समन्वय, जमीनी स्तर पर भागीदारी और व्यवस्था के भीतर मार्गदर्शकों की भूमिका को भी रेखांकित किया।
प्रमुख सत्र और चर्चाएं
सम्मेलन के दौरान विभिन्न विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। इनमें जनजातीय उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप इकोसिस्टम की संभावनाओं पर चर्चा हुई। साथ ही ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DAJGUA)’ के दायरे को बढ़ाकर अंतिम व्यक्ति तक सेवाएं पहुंचाने पर भी विचार किया गया।
अन्य चर्चाएं इस प्रकार रहीं:
- ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI) को और अधिक प्रभावी बनाना
- आदिवासी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, विशेषकर सिकल सेल रोग से जुड़ी योजनाओं को गति देना
- वन अधिकार अधिनियम (FRA) के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
जनभागीदारी के अभियान की झलक
सम्मेलन के दौरान ‘धरती आबा जनभागीदारी अभियान’ पर एक संक्षिप्त डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई, जिसमें अभियान की ग्यारह दिनों की उपलब्धियों को दर्शाया गया:
- 31,000 से अधिक सेवा शिविरों का आयोजन
- 74 लाख से अधिक जनजातीय नागरिकों तक पहुंच
- 3.12 लाख आधार पंजीकरण
- 3.22 लाख आयुष्मान कार्ड जारी
- 90,500 पीएम-किसान नामांकन
- 1.14 लाख जनधन खाते खोले गए
- 48,000 पीएम उज्ज्वला कनेक्शन
सम्मेलन में उपस्थित अधिकारियों ने नई योजनाओं की रूपरेखा और मौजूदा योजनाओं में आवश्यक बदलावों के सुझाव दिए। सभी सुझावों का मूल यही था कि योजनाएं समुदाय की वास्तविक जरूरतों और सपनों के अनुरूप हों, ताकि सकारात्मक और स्थायी बदलाव सुनिश्चित किए जा सकें।

