एशिया डॉन बायो-केयर, जो जैविक और प्राकृतिक खेती के लिए गुणवत्तापूर्ण ऑर्गेनिक इनपुट उत्पादों का निर्माण करती है, ने अप्रैल से जुलाई 2025 तक देशभर में प्रशिक्षण कार्यशालाओं और विक्रेता सम्मेलनों की श्रृंखला आयोजित की। इन आयोजनों का उद्देश्य किसानों को टिकाऊ खेती के लिए प्रशिक्षित करना, विक्रेताओं को उत्पादों की नई जानकारी देना, और कंपनी के नवाचारों को साझा करना रहा।
गुजरात के सूरत में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण में कंपनी के अध्यक्ष बंसल जी ने बताया कि शुद्ध, पौष्टिक और विषमुक्त भोजन आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने जोर दिया कि आत्मनिर्भर भारत का मार्ग आत्मनिर्भर कृषि से होकर गुजरता है। कंपनी के महाप्रबंधक प्रदीप कुमार सिंह ने फैक्ट्री विजिट के दौरान उत्पाद निर्माण की प्रक्रिया और “लाइओफिलाइज़ेशन टेक्नोलॉजी” की विस्तृत जानकारी दी, जिससे उत्पादों की शेल्फ लाइफ दो वर्ष तक हो जाती है।
प्रशिक्षक संजय श्रीवास्तव (30 वर्षों के जैविक खेती अनुभव के साथ) ने सजीव और विषरहित खेती में इन इनपुट्स के प्रयोग के तरीकों को समझाया। उन्होंने बताया कि कंपनी का कंसोर्सियम आधारित उत्पाद लागत में किफायती और प्रकृति के लिए पूर्णतः सुरक्षित है। अंत में टीम ने संकल्प लिया कि वे किसानों तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए गांवों में कार्यशालाएं करेंगे और खेत पर प्रदर्शन देंगे।
कंपनी ने फतेहपुर, उत्तर प्रदेश में विक्रेता सम्मेलन, राजस्थान के पुष्कर में विक्रेता स्नेह मिलन, पश्चिम बंगाल के दीघा में विक्रेता सम्मेलन और गुजरात के सूरत में दो दिवसीय विक्रेता प्रशिक्षण का आयोजन किया।
इस भव्य सम्मेलन में 125 विक्रेताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत कंपनी के प्रतिनिधि रितेश कुमार ने की। नई पैकिंग के तहत “प्रोडक्ट वही, अंदाज नया” थीम के अंतर्गत उत्पादों का अनावरण किया गया। श्रेष्ठ विक्रेताओं को उनके योगदान हेतु पुरस्कृत किया गया।
महाप्रबंधक प्रदीप कुमार सिंह ने कंपनी की यात्रा और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। एग्रोनॉमिस्ट संजय श्रीवास्तव ने उत्पादों के प्रयोग की तकनीक और प्रभाव को साझा किया।
एशिया डॉन बायो-केयर द्वारा देशभर में आयोजित कार्यशालाएं और विक्रेता सम्मेलन जैविक कृषि के प्रचार-प्रसार और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में ठोस प्रयास हैं। इन आयोजनों में किसान, विक्रेता और कंपनी अधिकारी मिलकर एक साझा लक्ष्य की ओर बढ़े – स्वस्थ समाज, स्वच्छ पर्यावरण और खुशहाल किसान। सभी प्रतिभागियों ने कंपनी के गुणवत्तापूर्ण उत्पादों को समय पर किसानों तक पहुंचाने का संकल्प लिया और कार्यक्रम का समापन प्रेरक नारे से हुआ –
“स्वच्छ अनाज, स्वस्थ समाज, सुरक्षित पर्यावरण, खुशहाल किसान।”

