कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने 20 जून 2025 तक की खरीफ फसलों की बुवाई प्रगति रिपोर्ट जारी कर दी है।इस साल कुल 137.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई की गई है, जो कि पिछले साल इसी समय की तुलना में 12.97 लाख हेक्टेयर ज्यादा है।
धान (चावल):
अब तक 13.22 लाख हेक्टेयर में बोया गया है, जो पिछले साल की तुलना में 4.86 लाख हेक्टेयर ज्यादा है।
दालें (पल्सेज़):
कुल बुवाई 9.44 लाख हेक्टेयर तक पहुँच चुकी है, पिछले वर्ष के मुकाबले 2.80 लाख हेक्टेयर की बढ़त।
- मूंग की बुवाई में 1.77 लाख हेक्टेयर की बढ़त,
- उड़द में 0.77 लाख हेक्टेयर की बढ़त,
- जबकि अरहर में 0.13 लाख हेक्टेयर की गिरावट दर्ज की गई।
श्री अन्न (मोटे अनाज):
18.03 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई है — जो 3.25 लाख हेक्टेयर की बढ़त दर्शाता है।
- मक्का में सबसे अधिक 2.01 लाख हेक्टेयर की बढ़त।
- ज्वार और बाजरा में भी अच्छी प्रगति।
तिलहन फसलें
तेल बीज फसलों में 5.38 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई, जो पिछले साल के मुकाबले 0.11 लाख हेक्टेयर कम है।
- सोयाबीन और मूंगफली की बुवाई में मामूली गिरावट,
- लेकिन तिल (सेसम) और सूरजमुखी (सनफ्लावर) में थोड़ी बढ़त।
गन्ना और कपास
- गन्ने की बुवाई में 0.20 लाख हेक्टेयर की वृद्धि के साथ कुल 55.07 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है।
- कपास की बुवाई में भी जोरदार बढ़त — अब तक 31.25 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई, जो पिछले साल से 2.14 लाख हेक्टेयर अधिक है।
जूट और मेस्ता
- जूट एवं मेस्ता की बुवाई में 0.17 लाख हेक्टेयर की गिरावट आई है।
कुल आंकड़ा
साल 2025 में अब तक खरीफ फसलों की बुवाई का कुल आंकड़ा 137.84 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुका है, जबकि 2024 में इसी समय तक यह 124.88 लाख हेक्टेयर था।खरीफ सीजन की बुवाई में यह तेज़ी, किसानों के बेहतर मानसून और सरकारी नीतियों पर भरोसे को दर्शाती है। आगे और कितनी तेजी आती है, इस पर अब सभी की नजरें टिकी हैं।

