AFFI के संयोजक मोहम्मद यूसुफ ने कहा कि सरकार से बार-बार अनुरोध के बावजूद सेब किसानों की प्रमुख मांगों को अनदेखा किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी सेब के आयात को बढ़ावा देने के लिए आयात शुल्क कम करने की राह खोल रहे हैं, जो देश के लाखों सेब उत्पादक किसानों के हितों के खिलाफ है।
केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
यूसुफ, जो जम्मू-कश्मीर विधानसभा के सदस्य भी हैं, ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री वादे तो खूब करते हैं, लेकिन उन्हें निभाने की रफ्तार बेहद धीमी है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों की बड़ी आबादी सेब की खेती पर निर्भर है, लेकिन सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) जैसी मूलभूत मांगों को भी नजरअंदाज कर रही है।
महंगाई की मार और बीमा योजना की नाकामी
बैठक में शामिल किसानों ने बताया कि उर्वरक, कीटनाशक और फफूंदनाशकों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन सब्सिडी या किसी तरह की राहत नहीं मिल रही है। यहां तक कि जम्मू-कश्मीर में सेब के लिए कोई बीमा योजना तक लागू नहीं की गई है।
तीन राज्यों के किसान एक मंच पर
AFFI और हिमाचल उत्पादक संघ की संयुक्त बैठक में हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के सैकड़ों सेब उत्पादकों ने हिस्सा लिया। सभी ने एक स्वर में सरकार से आयात शुल्क 100% तक बढ़ाने की मांग की, ताकि घरेलू किसानों को नुकसान से बचाया जा सके। यह मुद्दा हर चुनाव में गूंजता है, लेकिन समाधान अब तक अधूरा है।
तुर्किये से सस्ते सेबों का बहिष्कार
हाल ही में भारत-पाकिस्तान तनाव के चलते तुर्किये से आने वाले उत्पादों का देशभर में बहिष्कार देखने को मिला, जिसमें व्यापारिक संगठनों ने सस्ते आयातित सेबों को भी शामिल किया। इस फैसले का आम उपभोक्ताओं ने भी समर्थन किया, जिससे हिमाचल के सेब उत्पादकों को थोड़ी राहत मिली। राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी केंद्र सरकार से आयात शुल्क बढ़ाने की मांग की है

