ईरान और इजरायल के बीच बीते 12 दिनों से चल रहा भीषण संघर्ष आखिरकार थमता दिख रहा है। अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता के बाद दोनों देशों ने संघर्षविराम पर सहमति जता दी है। मंगलवार को ईरान के सरकारी टेलीविजन ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि सीजफायर लागू कर दिया गया है। उधर, इजरायल ने भी बंकर अलर्ट हटाकर नागरिकों को सामान्य जीवन की ओर लौटने की अनुमति दे दी है।
हालांकि शुरुआती घंटों में हालात पूरी तरह शांत नहीं रहे। इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) के अनुसार, सीजफायर के ऐलान के कुछ ही घंटों के भीतर ईरान की ओर से तीन बार मिसाइल हमले किए गए, जिनमें चार आम नागरिकों की जान चली गई। इस हमले के बाद तेल अवीव में सायरन बजाए गए और लोगों को दोबारा सुरक्षित ठिकानों पर भेजा गया। लेकिन उसके बाद हालात धीरे-धीरे स्थिर हो रहे हैं।
ट्रंप की मध्यस्थता से बनी ‘विन-विन’ स्थिति?
विशेषज्ञों की मानें तो यह संघर्षविराम तीनों ही पक्षों—ईरान, इजरायल और अमेरिका—के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है:
ईरान: सैन्य टकराव की आग में फंसे बिना उसने आक्रामकता दिखाई और अपनी जनता को यह संदेश दिया कि वह दबाव में नहीं झुकता। इसके अलावा, घरेलू असंतोष को राष्ट्रीय एकजुटता में बदलने का मौका मिला।
इजरायल: उसने अपनी रक्षा क्षमताओं को दिखाया और अंतरराष्ट्रीय समर्थन बनाए रखा। साथ ही लंबे युद्ध से बचते हुए वह रणनीतिक बढ़त पर कायम रहा।
अमेरिका (ट्रंप): ट्रंप के लिए यह मध्यस्थता 2024 के चुनावी माहौल में एक डिप्लोमैटिक जीत की तरह है। उन्होंने खुद को ‘शांतिदूत’ के तौर पर पेश किया, जो मध्य पूर्व में तनाव कम करने की ताकत रखता है।
क्या संघर्ष वास्तव में थम गया है?
हालांकि सीजफायर लागू हो गया है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह अस्थायी राहत हो सकती है। ईरान की ओर से जारी बमबारी और इजरायल की सतर्कता इस बात का संकेत हैं कि दोनों देश पूरी तरह भरोसे की स्थिति में नहीं हैं। आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि यह शांति स्थायी होगी या सिर्फ एक ‘अंतराल’।

