देशभर में खरीफ सीजन की शुरुआत होते ही किसानों का ध्यान अब तेजी से सोयाबीन की ओर बढ़ रहा है।मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में इस बार बड़ी संख्या में किसान पारंपरिक फसलों की बजाय सोयाबीन की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसका कारण है इसकी कम लागत, बाजार में बेहतर दाम और बदलते मौसम के अनुसार इसकी अनुकूलता।
क्यों बढ़ रही है सोयाबीन की मांग?
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कम लागत और कम पानी की आवश्यकता
सोयाबीन की खेती के लिए धान या गन्ने की तुलना में कम पानी और उर्वरक की जरूरत होती है, जिससे किसानों का खर्च कम होता है। -
मजबूत बाजार
सोयाबीन की मांग घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बनी हुई है। इसका उपयोग तेल उत्पादन, पशु आहार और विभिन्न खाद्य उत्पादों में होता है। -
सरकारी सहयोग
केंद्र और राज्य सरकारें सोयाबीन की खेती को बढ़ावा देने के लिए बीज सब्सिडी, प्रशिक्षण कार्यक्रम और MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) जैसी योजनाएं चला रही हैं।
नई तकनीकों का बढ़ता प्रभाव
इस बार कई किसान “लाइन sowing”, “बीज उपचार”, और “ड्रिप इरिगेशन” जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे फसल की उपज में 20–30% तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है।

