हरियाणा – राज्य के प्रमुख कृषि जिले करनाल में इस बार धान की रोपाई का सीजन समय से पहले ही जोर पकड़ चुका है। खास बात यह है कि किसान पारंपरिक तरीकों की जगह अब डीएसआर (Direct Seeding of Rice) तकनीक को तेजी से अपना रहे हैं। इस तकनीक को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार किसानों को प्रति एकड़ ₹4,000 तक की सब्सिडी भी दे रही है।
DSR तकनीक के फायदे:
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पानी की 30–35% तक बचत
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लेबर पर निर्भरता में कमी
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समय की बचत और मृदा स्वास्थ्य बेहतर
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अधिक उपज की संभावना
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस साल जिले में 10,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में DSR तकनीक के जरिए रोपाई का लक्ष्य है। खेतों में लेज़र लेवलिंग के बाद बीज सीधे बोए जा रहे हैं, जिससे न तो नर्सरी की ज़रूरत पड़ रही है और न ही अधिक मजदूरी।
किसानों में दिखा उत्साह
गांव घरौंडा के किसान राजपाल सिंह ने बताया, “पिछले साल पहली बार DSR तकनीक अपनाई थी, तो पानी और मजदूरी दोनों में भारी बचत हुई। इस बार फिर इसी से रोपाई कर रहा हूं। सरकार की सब्सिडी से लागत भी कम हो रही है।”
सरकार की ओर से क्या मिल रहा है?
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DSR मशीन खरीदने पर 50% तक सब्सिडी
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प्रति एकड़ ₹4000 की सहायता राशि
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किसानों को प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि, “जिन किसानों ने इस तकनीक को अपनाने के लिए आवेदन किया है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सब्सिडी दी जा रही है।”

