डिजिटल सुशासन को जन केंद्रित और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधीन राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन ‘भाषिणी’ के बीच आज एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य ई-ग्रामस्वराज प्लेटफॉर्म को वास्तविक समय में बहुभाषी पहुँच से लैस करना है, जिससे देश के ग्रामीण नागरिकों को डिजिटल सेवाओं तक सहज और समावेशी पहुँच मिल सकेगी।
कार्यक्रम में केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल, पंचायती राज सचिव विवेक भारद्वाज, MeitY के अपर सचिव अभिषेक सिंह, MoPR के संयुक्त सचिव आलोक प्रेम नगर, भाषिणी के CEO अमिताभ नाग, तथा MoPR के आर्थिक सलाहकार डॉ. बिजय कुमार बेहरा उपस्थित रहे। MoU पर MoPR की ओर से श्री आलोक प्रेम नगर और भाषिणी की ओर से श्री अमिताभ नाग ने हस्ताक्षर किए।
समारोह में बोलते हुए प्रो. एस. पी. सिंह बघेल ने इस साझेदारी को “समावेशी लोकतंत्र का प्रतीक” बताया। उन्होंने कहा कि भारत की भाषाई विविधता को सम्मान देते हुए यह सहयोग पंचायत स्तर पर सुशासन को सशक्त बनाने वाला है। भाषिणी की एआई-आधारित अनुवाद तकनीक के माध्यम से अब ई-ग्रामस्वराज जैसे प्लेटफॉर्म स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध होंगे, जिससे सेवा वितरण अधिक सहभागी, स्थानीय और नागरिक केंद्रित बनेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) की रणनीतिक क्रियान्वयन ने ग्रामीण भारत में बदलाव लाया है। डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से सेवाओं की पारदर्शिता और दक्षता में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने पंचायत भवनों में कॉमन सर्विस सेंटर्स की सह-स्थिती की भी सराहना की, जिससे ग्रामीणों को डिजिटल सेवाएं सुगमता से मिल रही हैं।
विवेक भारद्वाज ने इस MoU को ऐतिहासिक और दूरदर्शी बताया, जो भाषा के माध्यम से तकनीकी पहुंच को सशक्त बनाएगा। उन्होंने कहा कि भाषिणी की तकनीक से अब ई-ग्रामस्वराज जैसे सरकारी प्लेटफॉर्म भारत की अनेक भाषाओं में उपलब्ध होंगे, जिससे स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और कल्याण योजनाओं की जानकारी गाँव-गाँव तक उनकी स्थानीय भाषा में पहुँचेगी।
अभिषेक सिंह ने बताया कि भाषिणी के माध्यम से विकसित भाषा टूल अब अधिकांश सरकारी वेबसाइटों में एकीकृत किए जा चुके हैं। अब तक 100 करोड़ से अधिक उपयोग (inferences) इन टूल्स के माध्यम से हो चुके हैं, जिनमें से लगभग 15 करोड़ उपयोग MoPR के प्लेटफॉर्म्स से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि भविष्य में भाषिणी उद्यत, भाषिणी मित्र, भाषिणी ऐपमित्र, भाषिणी सहयोगी, और भाषिणी प्रवक्ता जैसे नए पहल ग्रामीणों को उनकी मातृभाषा में डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद करेंगे।
इस अवसर पर भाषिणी एंथम का भी प्रस्तुतीकरण किया गया, जो भारत की भाषाई एकता का प्रतीक है और समावेशीता की भावना को दर्शाता है। समारोह के अंत में एक लघु वीडियो के माध्यम से भाषिणी की एआई तकनीक के साथ ई-ग्रामस्वराज की एकीकरण प्रक्रिया को प्रदर्शित किया गया, जो अब देश की 2.5 लाख से अधिक पंचायतों द्वारा योजना, बजट और रिपोर्टिंग के लिए उपयोग में लाया जा रहा है।यह साझेदारी भारत को डिजिटली सशक्त, आत्मनिर्भर और भाषाई रूप से समावेशी ग्राम पंचायतों की दिशा में एक ठोस कदम की ओर अग्रसर करती है।

