नई दिल्ली के उजवा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से राजधानी के किसानों के लिए ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के अंतर्गत एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में किसानों ने भाग लिया और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, सरकारी योजनाओं और उन्नत खेती की विधियों की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र, उजवा के प्रभारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डी. के. राणा ने ‘फसल क्रांति’ से विशेष बातचीत में बताया कि, “इस अभियान का उद्देश्य किसानों तक वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की जानकारी पहुँचाना है, जिससे वे अपने खेतों की उत्पादकता को बढ़ा सकें और समय पर अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकें।”
डॉ. राणा ने बताया कि इस अभियान के तहत किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न कृषि कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्हें यह बताया गया कि वे इन योजनाओं का लाभ किस तरह से आवेदन कर और उचित मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।कार्यक्रम की एक खास बात यह रही कि इसमें किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच प्रत्यक्ष संवाद स्थापित हुआ। इस संवाद के दौरान किसानों ने अपनी फसलों से जुड़ी समस्याएँ साझा कीं, जिनमें से कई समस्याओं का समाधान मौके पर ही किया गया।
इस अवसर पर किसानों को प्राकृतिक खेती के फायदों के बारे में विशेष जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, जबकि प्राकृतिक खेती से भूमि की सेहत सुधरती है और उत्पादन में स्थायित्व आता है।
कार्यक्रम में किसानों को मशरूम उत्पादन, फल एवं सब्जी की खेती, और विशेष रूप से स्ट्रॉबेरी जैसी नगदी फसलों की खेती के बारे में भी मार्गदर्शन दिया गया। दिल्ली जैसे शहरी क्षेत्रों में भी स्ट्रॉबेरी की सफल खेती की संभावनाओं पर चर्चा की गई, जिससे किसानों को अधिक लाभ मिल सकता है।
डॉ. राणा ने यह भी बताया कि, “कृषि विज्ञान केंद्र उजवा लगातार किसानों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि क्षेत्र में कृषि नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके। हमारा उद्देश्य सिर्फ खेती की उपज बढ़ाना नहीं है, बल्कि किसानों की आय को दोगुना करने की दिशा में ठोस प्रयास करना है।”
दिल्ली में आयोजित यह कार्यक्रम किसानों के लिए ज्ञानवर्धक और समस्याओं के समाधान का एक प्रभावी मंच साबित हुआ। इस प्रकार के आयोजनों से किसानों को न केवल तकनीकी जानकारी मिलती है, बल्कि वे नई संभावनाओं को पहचानकर अपने कृषि व्यवसाय को नई दिशा भी दे सकते हैं।

