केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) द्वारा आयोजित दूसरे नीति निर्धारक फोरम के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण दिया। इस फोरम का उद्देश्य भारतीय फार्माकोपिया की वैश्विक मान्यता और प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) के अंतर्गत सस्ती दवाओं की पहल को सहयोग देना है। यह कार्यक्रम स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में और विदेश मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया गया।
इस अंतरराष्ट्रीय फोरम में 24 देशों के नीति निर्धारकों और दवा नियामकों ने भाग लिया, जिनमें लाइबेरिया, केन्या, क्यूबा, चिली, बोट्सवाना, एथियोपिया, पापुआ न्यू गिनी जैसे देश शामिल हैं। इसके साथ ही कैरेबियन पब्लिक हेल्थ एजेंसी (CARPHA) के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। यह फोरम अगस्त 2024 में हुए पहले संस्करण की सफलता पर आधारित है, जिसमें कई देशों ने भारतीय फार्माकोपिया को औषधियों के मानक ग्रंथ के रूप में मान्यता दी थी।
अपने भाषण में, मती अनुप्रिया पटेल ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत आज सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं का वैश्विक केंद्र बन चुका है।” उन्होंने नियमात्मक समन्वय (regulatory harmonization) के महत्व को रेखांकित किया और यह भी बताया कि भारत न केवल दवाएं वितरित कर रहा है, बल्कि गरिमापूर्ण और समान स्वास्थ्य सुविधा का संकल्प भी निभा रहा है।उन्होंने कहा, “जनऔषधि केंद्र भारत की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक हैं, जो हर नागरिक को गुणवत्तायुक्त और सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने का कार्य कर रहे हैं। इन केंद्रों के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर खर्च में भारी कमी आई है।”
वैक्सीन निर्माण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि “विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की कुल 70% वैक्सीन की आपूर्ति भारत से होती है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल के तहत 100 से अधिक देशों को वैक्सीन की आपूर्ति कर वैश्विक स्वास्थ्य में अपनी जिम्मेदारी निभाई।”उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि “भारत में बनने वाली 70% जेनेरिक दवाएं उच्च नियामक बाजारों में निर्यात होती हैं और US FDA द्वारा मान्यता प्राप्त दवा संयंत्रों की संख्या भारत में सबसे अधिक है।” उन्होंने कहा कि 15 देशों ने अब तक भारतीय फार्माकोपिया को औषधियों के लिए मानक ग्रंथ के रूप में स्वीकार किया है, जिसमें हाल ही में क्यूबा भी शामिल हुआ है।
स्वास्थ्य सचिव मती पुण्य सलीला वास्तव ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “भारत ‘One Earth, One Health’ की भावना से जुड़ा है और हम सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लिए प्रतिबद्ध हैं।” उन्होंने बताया कि भारत में अब तक 1.75 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर (पूर्व में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स) स्थापित किए जा चुके हैं, जहां निःशुल्क दवाएं और जांच सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।उन्होंने यह भी बताया कि भारत की आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के तहत 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध है, जिससे देश की 40% आबादी लाभान्वित हो रही है।
कार्यक्रम के दौरान भारतीय फार्माकोपिया आयोग की 15 वर्ष की यात्रा पर आधारित एक डिजिटल स्मारक प्रकाशन भी लॉन्च किया गया। तकनीकी सत्र में IPC की भूमिका, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की प्रणाली और जनऔषधि परियोजना के कार्यान्वयन व प्रभाव पर प्रस्तुतियां दी गईं।16 से 19 जून 2025 तक चलने वाले इस चार दिवसीय फोरम के दौरान प्रतिनिधि भारतीय फार्माकोपिया प्रयोगशालाओं, आगरा के जनऔषधि केंद्र और अहमदाबाद के प्रमुख दवा और वैक्सीन निर्माण व अनुसंधान केंद्रों का दौरा करेंगे।इस अवसर पर राजीव वाधवान (सलाहकार, स्वास्थ्य मंत्रालय), डॉ. रंगा चंद्रशेखर (संयुक्त औषधि नियंत्रक), रवि दधीच (सीईओ, फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेज ब्यूरो ऑफ इंडिया) सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।यह फोरम वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग, ज्ञान साझा करने और नियामक समन्वय को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

