एफजी-एआईएनएन बिल्ड-ए-थॉन 2025 का समापन आज हुआ, जिसमें दुनियाभर से चयनित 10 टीमों ने अपनी नवीनतम एआई-नेटिव टेलीकॉम तकनीकों का प्रदर्शन किया। यह प्रतियोगिता इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) के फोकस ग्रुप ऑन ऑटोनॉमस नेटवर्क्स (FG-AINN) की तीसरी बैठक के हिस्से के रूप में 11 जून 2025 से नई दिल्ली में आयोजित की गई थी।यह कार्यक्रम भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) की तकनीकी इकाई टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग सेंटर (TEC) और ITU द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य एआई-नेटिव नेटवर्किंग में वैश्विक मानकों के विकास को बढ़ावा देना था।
वैश्विक नवाचार के लिए एक साझा मंच
FG-AINN Build-a-thon 2025 ने एआई-नेटिव नेटवर्किंग सिस्टम के विकास को गति देने के लिए एक वैश्विक प्रतियोगिता के रूप में कार्य किया। इसका उद्देश्य था ऐसे नवाचारों की पहचान करना जो ऑटोनॉमस नेटवर्किंग, क्लोज्ड-लूप ऑटोमेशन, इंटेंट-बेस्ड ऑपरेशन्स और डिजिटल ट्विन जैसे अत्याधुनिक नेटवर्किंग सिद्धांतों पर आधारित हों। यह मंच डेवलपर्स, शोधकर्ताओं, छात्रों, स्टार्टअप्स और टेलीकॉम पेशेवरों को एक साथ लाकर ओपन-सोर्स समाधान तैयार करने का अवसर प्रदान करता है।
प्रतियोगिता की प्रक्रिया और भागीदारी
बिल्ड-ए-थॉन में पंजीकरण मई 2025 के आरंभ में शुरू हुआ था, जिसमें 23 टीमों और कुल 57 प्रतिभागियों ने भाग लिया। नियमित मेंटरिंग सत्रों के बाद 10 टीमों को अंतिम दौर के लिए चुना गया। इन टीमों ने आज अपने प्रोटोटाइप और प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट प्रस्तुत किए।
विजेताओं को किया गया सम्मानित
सभी चयनित प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिए गए। शीर्ष तीन पुरस्कारों से सम्मानित टीमों में शामिल हैं:
- प्रथम स्थान: टीम SliceMinds
- द्वितीय स्थान: टीम SNR
- तृतीय स्थान: टीम Nowiresattached
इसके अलावा, टीम AIONETx को सर्वश्रेष्ठ महिला टीम के रूप में विशेष सम्मान मिला। टीम OMACS और टीम SSN को उत्कृष्ट मेंटरशिप के लिए सराहना प्रदान की गई।
पुरस्कार वितरण समारोह में प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं
- त्रिप्ती सक्सेना (वरिष्ठ उपमहानिदेशक, TEC)
- डॉ. राजकुमार उपाध्याय (मुख्य कार्यकारी अधिकारी, C-DOT)
- दीपेश श्रीवास्तव (एवीपी, तेजस नेटवर्क्स)
भारत–ITU साझेदारी का डिजिटल भविष्य की ओर मजबूत कदम
इस बिल्ड-ए-थॉन के माध्यम से भारत और ITU के बीच एआई आधारित टेलीकॉम नवाचार के क्षेत्र में सहयोग और अधिक सशक्त हुआ है। यह पहल न केवल तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देती है, बल्कि नैतिक, समावेशी और मानकीकृत एआई समाधान विकसित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

