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खेती में तकनीकी नवाचार का एक शानदार उदाहरण पेश करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) द्वारा विकसित रिमोट संचालित धान ट्रांसप्लांटर का सफलतापूर्वक संचालन किया — वो भी खेत में कदम रखे बिना। यह प्रदर्शन 5 जून 2025 को कृषि विज्ञान केंद्र, पटियाला में आयोजित “विकसित कृषि संकल्प अभियान – खरीफ 2025” के अंतर्गत किया गया।
§ֆ:मंत्री जी ने खेत के किनारे खड़े होकर एक वायरलेस रिमोट की मदद से दो-पहिया धान ट्रांसप्लांटर को सहजता से संचालित किया और इस सेंसर-आधारित स्वचालित तकनीक के लिए PAU की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार छोटे और सीमांत किसानों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होंगे, क्योंकि ये श्रम में कमी, कार्य कुशलता में वृद्धि और उत्पादन लागत में कटौती करते हैं।
§ֆ:इस तकनीक को विकसित किया गया है PAU के फार्म मशीनरी एंड पावर इंजीनियरिंग विभाग द्वारा, राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना (NAHEP) और AICRP-ESAAS के तहत। इस मशीन का उद्देश्य पारंपरिक ट्रांसप्लांटिंग में आने वाली शारीरिक थकान और कार्य कठिनाई को कम करना है।
§ֆ:§֍:पारंपरिक ट्रांसप्लांटिंग बनाम PAU की तकनीक:§ֆ:• पारंपरिक दो-पहिया ट्रांसप्लांटर के संचालन में किसानों को 38–44 डिग्री तापमान और 70% से अधिक आर्द्रता में 20 किलोमीटर तक चलना पड़ता है, जिससे अत्यधिक थकान होती है।
• PAU के रिमोट संचालित ट्रांसप्लांटर के प्रयोग से:
o ऑपरेटर की थकान में 85% तक की कमी
o लेबर की आवश्यकता में 40% की कमी
o क्षेत्र क्षमता में 10–12% वृद्धि
o 5–15% तक का शुद्ध लाभ संभव हुआ है।
§ֆ:ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जात ने भी इस नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि AI और रोबोटिक्स आधारित खेती ही भविष्य का रास्ता है, और PAU देश में इस दिशा का नेतृत्व कर रहा है।
PAU के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने बताया कि विश्वविद्यालय ने “School of Digital Innovations for Smart Agriculture (S-DISA)” की स्थापना की है, जिसका उद्देश्य खेती में डिजिटल समाधानों का तेजी से प्रसार करना है।
§ֆ:कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के डीन डॉ. मंजीत सिंह ने बताया कि इस मशीन को किसान मेलों, फील्ड डेमो और प्रशिक्षण शिविरों में दिखाया गया है, जिससे किसानों में इसके प्रति गहरी रुचि और उत्साह देखने को मिला है।§

