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कृषि क्षेत्र में नवाचार, तकनीकी हस्तांतरण और किसान-वैज्ञानिक संवाद को मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गया ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इस 15 दिवसीय महा-अभियान के अंतर्गत देशभर के लाखों किसानों से सीधा संवाद स्थापित किया गया। 14वें दिन, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली के बाहरी इलाके में स्थित तिगिपुर गांव का दौरा किया, जहां उन्होंने किसानों से प्रत्यक्ष संवाद कर उनकी समस्याओं को जाना और समाधान के लिए सुझाव दिए।
§ֆ:इस मौके पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट, वरिष्ठ वैज्ञानिकों और कृषि मंत्रालय के अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में यह संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक शोध, आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकार की योजनाओं से जोड़ना है ताकि खेती को लाभकारी, टिकाऊ और भविष्य उन्मुख बनाया जा सके।
§ֆ:§֍:किसान चौपाल में सीधा संवाद §ֆ:कृषि मंत्री ने तिगिपुर में आयोजित किसान चौपाल में भाग लेते हुए स्थानीय किसानों से खुलकर बातचीत की। चौपाल के दौरान उन्होंने किसानों से बीज उत्पादन, पॉलीहाउस खेती, स्ट्रॉबेरी जैसी उच्च मूल्य की फसलों, और कृषि में नवाचार पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे खेती में नई तकनीक अपनाकर किसान अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं। उन्होंने नवाचारों में अग्रणी किसानों के अनुभव भी सुने और उन्हें “देश की नई खेती के अग्रदूत” करार दिया।
§֍:ड्रोन और नर्सरी तकनीक का व्यावहारिक प्रदर्शन§ֆ:कृषि मंत्री ने ड्रोन तकनीक के माध्यम से कीटनाशक और पोषक तत्वों के छिड़काव का लाइव प्रदर्शन देखा। उन्होंने वैज्ञानिकों से इस तकनीक की लागत, प्रभावशीलता, और छोटे किसानों के लिए इसकी उपयोगिता के बारे में विस्तृत जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने नर्सरी क्षेत्र का पैदल दौरा भी किया, जहां पौध उत्पादन, उन्नत किस्मों की खेती और किसानों के साथ तकनीक के अनुप्रयोगों पर चर्चा की गई।
§֍:”अनुसंधान अब प्रयोगशालाओं में नहीं, खेतों में होगा”: मंत्री का नया दृष्टिकोण§ֆ:सभा को संबोधित करते हुए श्री चौहान ने स्पष्ट किया कि अब कृषि अनुसंधान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा,
“अब वैज्ञानिक सीधे गांवों में जाकर किसानों से फीडबैक लाएंगे और उसी के आधार पर अनुसंधान एवं नीतियां तय होंगी। यह किसानों को नीति निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाएगा।”
उन्होंने बताया कि इस अभियान के दौरान ICAR की 2,170 वैज्ञानिक टीमों ने देशभर में लगभग 1.08 करोड़ किसानों से प्रत्यक्ष संवाद कर उन्हें आधुनिक तकनीक और योजनाओं के बारे में जागरूक किया है। जहां तत्काल समाधान संभव था, वहां त्वरित कार्य किया गया है और अन्य विषयों पर गंभीर प्रयास जारी हैं।
§֍:मिट्टी की उर्वरता, फसल विविधीकरण और बागवानी आधारित मॉडल पर जोर§ֆ:कृषि मंत्री ने मिट्टी की घटती उर्वरता पर चिंता जताते हुए किसानों से सॉइल हेल्थ कार्ड के आधार पर खेती करने की अपील की। उन्होंने कहा कि टिकाऊ खेती का आधार मिट्टी की वैज्ञानिक जांच है और इसके बिना उत्पादकता में दीर्घकालीन सुधार संभव नहीं। उन्होंने विशेष तौर पर फसल विविधीकरण, बाजारोन्मुखी खेती और बागवानी आधारित मॉडल्स पर सरकार के फोकस की जानकारी दी।
दिल्ली जैसे शहरी क्षेत्रों को बागवानी हब के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर बोलते हुए उन्होंने कहा,
“दिल्ली और इसके आस-पास के क्षेत्रों में बाजार की जबरदस्त उपलब्धता है। यहां बागवानी, फूलों की खेती और मूल्यवर्धन आधारित मॉडल बहुत सफल हो सकते हैं।”
§֍:तकनीक आधारित खेती और केंद्र सरकार की योजनाओं से जुड़ेंगे दिल्ली के किसान§ֆ:कृषि मंत्री ने किसानों को स्पष्ट संदेश दिया कि तकनीक के बिना खेती में प्रतिस्पर्धा संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कृषि उत्पादन से लेकर विपणन तक हर स्तर पर किसानों को तकनीकी सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अब दिल्ली के किसान भी केंद्र की सभी प्रमुख कृषि योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।
उन्होंने यह स्वीकार किया कि अब तक दिल्ली के किसान प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA), मूल्य समर्थन योजना, मूल्य अंतर भरपाई योजना, बाजार हस्तक्षेप योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, परंपरागत कृषि विकास योजना, नए बाग लगाने एवं पुराने बागों के नवीनीकरण, नर्सरी विकास, कृषि यंत्र सब्सिडी, और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी अनेक योजनाओं से वंचित रहे हैं।
अब इस स्थिति में बदलाव लाया जाएगा। दिल्ली सरकार से इन योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु प्रस्ताव मांगा गया है। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक कांटे और खाद की खरीद के लिए भी केंद्र सरकार सहायता प्रदान करेगी।
§֍:नकली उर्वरकों और कीटनाशकों पर सरकार की सख्त चेतावनी§ֆ:कृषि मंत्री ने नकली कीटनाशक और उर्वरक विक्रेताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसे लोगों को बिलकुल नहीं बख्शा जाएगा। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार इस विषय पर एक कड़ा कानून लाने जा रही है, जिससे किसानों के साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी पर कठोर कार्रवाई की जा सके।
§֍:अभियान का समापन गुजरात के बारडोली में होगा§ֆ:अंत में श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दिल्ली सहित पूरे देश के किसानों की तस्वीर और तकदीर बदलने की दिशा में तेज़ी से काम हो रहा है। उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया कि सरकार उनकी उन्नति, आत्मनिर्भरता और समृद्धि के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
उन्होंने यह भी बताया कि 15 दिवसीय इस अभियान का समापन 13 जून को गुजरात के बारडोली में होगा, जहां अब तक के अनुभवों और किसान संवादों का व्यापक विश्लेषण किया जाएगा।
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