֍:स्थानीय संस्थान, वैश्विक सम्मान§ֆ:ब्रेकथ्रू प्राइज़, जिसे “विज्ञान का ऑस्कर” भी कहा जाता है, उन खोजों को सम्मानित करता है जो ब्रह्मांड के मूलभूत नियमों को समझने में क्रांतिकारी योगदान देती हैं। इस वर्ष यह पुरस्कार चारों CERN प्रयोगों को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया, जिनमें हजारों अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक कार्यरत हैं (ATLAS: 5345, CMS: 4550, ALICE: 1869, LHCb: 1744 शोधकर्ता)। CMS (कॉम्पैक्ट म्यूऑन सोलोनॉयड) सहयोग में PAU का EMN लैब (Experimental Multidisciplinary Nuclear Laboratory) भी सक्रिय भागीदार है, जिसका नेतृत्व डॉ. नितीश ढींगरा कर रहे हैं। CMS सहयोग में उनका योगदान उल्लेखनीय है,
§ֆ:• स्टैंडर्ड मॉडल से परे नई भौतिकी की खोज के लिए डेटा विश्लेषण,
• सटीक माप व सिमुलेशन मान्यता (PdmV),
• और CMS म्यूऑन सिस्टम में GEM डिटेक्टर अपग्रेड में तकनीकी योगदान।
यह शोध कार्य पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ और भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के सहयोग से किया गया।
§ֆ:पुरस्कार पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. ढींगरा ने कहा,“हमारे वैश्विक वैज्ञानिक प्रयासों को मान्यता मिलना गर्व का विषय है। मैं DST और PAU का आभारी हूं, जिनके सहयोग के बिना यह संभव नहीं होता।”
§ֆ:PAU के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल, अनुसंधान निदेशक डॉ. अजमेर सिंह धत, अतिरिक्त निदेशक (कृषि) डॉ. गुरजीत सिंह मंगत, और EMN लैब प्रभारी डॉ. अनु कालिया ने इस उपलब्धि पर डॉ. ढींगरा को बधाई दी और कहा कि यह विश्वविद्यालय के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण है।
§֍:जब कृषि संस्थान बना मूलभूत भौतिकी का केंद्र§ֆ:इस उपलब्धि ने यह प्रमाणित किया है कि अनुसंधान की सीमाएं अब पारंपरिक विषयों तक सीमित नहीं रहीं। एक कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक का CERN जैसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक प्रयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना यह दर्शाता है कि विषयों के बीच सहयोग (interdisciplinary research) अब नई खोजों की कुंजी बन चुका है। $3 मिलियन की पुरस्कार राशि का उपयोग CERN सदस्य संस्थानों के डॉक्टोरल छात्रों के अनुसंधान कार्य के लिए किया जाएगा, जिससे भारत के भावी वैज्ञानिकों को विश्व स्तरीय अवसर मिलेंगे।
§֍:निष्कर्ष: विज्ञान सीमाएं नहीं मानता§ֆ:डॉ. नितीश ढींगरा की यह ऐतिहासिक उपलब्धि केवल PAU या भारत के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के लिए प्रेरणा है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि वैज्ञानिक उत्कृष्टता न किसी संस्थान की प्रकृति पर निर्भर करती है, न ही विषय की सीमा पर — बल्कि यह जिज्ञासा, प्रतिबद्धता और सहयोग से जन्म लेती है।
भविष्य में ऐसे सहयोग न केवल भारत की वैज्ञानिक स्थिति को सुदृढ़ करेंगे, बल्कि कृषि, तकनीकी और भौतिकी जैसे क्षेत्रों में नवाचार को भी नई दिशा देंगे।
§पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU), लुधियाना के लिए यह गर्व का क्षण है क्योंकि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. नितीश ढींगरा को विश्व के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक सम्मान 2025 ब्रेकथ्रू प्राइज़ इन फंडामेंटल फिज़िक्स के विजेता शोधकर्ताओं में शामिल किया गया है। यह पुरस्कार CERN (जिनेवा) के लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (LHC) की Run2 डेटा पर आधारित ATLAS, CMS, ALICE और LHCb इन चार प्रमुख प्रयोगों के वैज्ञानिकों को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया है। यह पुरस्कार भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग में भारतीय शोधकर्ताओं की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हैऔर इस बार, कृषि विश्वविद्यालय का एक वैज्ञानिक इस उपलब्धि का हिस्सा है।

