ֆ:कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. सतबीर सिंह गोसल, कुलपति, PAU ने कहा कि विश्वविद्यालय 1962 से पंजाब की कृषि प्रगति में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने सब्जियों जैसे मटर, आलू, मस्कमेलन और तरबूज को फसल विविधिकरण का प्रभावी साधन बताया और किसानों से जल और उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील की।डॉ. अजमेर सिंह धत्त, निदेशक अनुसंधान, ने ‘पंजाब अमृत’ किस्म को बड़े स्तर पर अपनाने की सलाह दी और किसानों को भरोसा दिलाया कि बीजों की उपलब्धता मांग के अनुसार सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि PAU द्वारा विकसित कई उन्नत किस्में और हाइब्रिड फसलें किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हैं।§ֆ:डॉ. तरसेम सिंह ढिल्लों, अतिरिक्त निदेशक विस्तार शिक्षा, ने कहा कि PAU का मजबूत विस्तार नेटवर्क किसानों को आधुनिक सब्जी उत्पादन तकनीकें अपनाने में मदद कर रहा है।डॉ. सतपाल शर्मा, प्रमुख, सब्जी विज्ञान विभाग, ने ‘पंजाब अमृत’ को खुली परागण वाली किस्म बताया, जिसकी फल आकृति अंडाकार-गोल होती है, जालदार छिलका, क्रीमी पीली सतह और सफेद कुरकुरी गूदा इसकी विशेषता है। इस किस्म में 15% TSS (शर्करा) होता है और यह औसतन 85 क्विंटल प्रति एकड़ उपज देती है। यह महंगे हाइब्रिड किस्मों की तुलना में किसानों के लिए लागत-कटौती का बेहतर विकल्प है।§ֆ:कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. हरिंदर सिंह ने सभी का स्वागत किया, वहीं डॉ. अमनदीप कौर ने कपूरतला के फसल चक्र के बारे में जानकारी दी और धान–आलू–मस्कमेलन रोटेशन को एक सफल विविधिकरण मॉडल बताया।डॉ. दिलप्रीत तलवार ने मस्कमेलन की उन्नत उत्पादन तकनीकों पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. सुमन कुमारी ने फसल सुरक्षा उपायों की जानकारी दी।
इस अवसर पर डॉ. बिंदु, श्रीमती अवनीत कौर, और स्नातकोत्तर छात्र मेंदा साई सिंधु तथा अमनदीप कौर भी उपस्थित रहे।
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पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU) द्वारा विकसित की गई मस्कमेलन की उन्नत किस्म ‘पंजाब अमृत’ ने अपनी बेहतरीन गुणवत्ता और ऊंची पैदावार से किसानों को प्रभावित किया है। इस किस्म को लेकर कृषक जागरूकता दिवस का आयोजन कपूरतला के बरिंदपुर गांव स्थित ढोट फार्म में किया गया। यह कार्यक्रम PAU के सब्जी विज्ञान विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र, कपूरतला के संयुक्त प्रयास से संपन्न हुआ, जिसमें 70 से अधिक किसान शामिल हुए।

