ֆ:गणेश प्रणव ने बताया कि उन्होंने 10 साल पहले पूरी तरह से जैविक खेती अपनाई थी। “मेरी मुख्य फसल धान है। हमारे क्षेत्र के अधिकांश किसान खंभों और तारों की बाड़ लगाते हैं, लेकिन यह टिकाऊ नहीं होती और बार-बार बदलनी पड़ती है। मैंने सोचा कि कोई प्राकृतिक और लाभकारी समाधान ढूंढा जाए,” उन्होंने कहा।§ֆ:तीन-स्तरीय सुरक्षा§ֆ:उन्होंने बताया, “बाहरी परत में कैक्टस, एलोवेरा और सूडान थॉर्न जैसे कांटेदार पौधे लगाए गए हैं। शुरुआती तीन साल तक छोटे छेद वाली मछली पकड़ने की जाली का इस्तेमाल किया, जब तक पौधे अच्छे से बढ़ न जाएं। फिर नारियल, केला, अफ्रीकी महोगनी और ओडियन के पेड़ लगाए, जो कटिंग से उगाए जा सकते हैं। साथ ही बाँस के पौधे भी लगाए ताकि केले और महोगनी को सहारा मिल सके।”§ֆ:गणेश प्रणव ने बताया कि नारियल और केले का उत्पादन धान से अधिक है, और इस जैविक बाड़ से बनी माइक्रो बायोस्फीयर प्रणाली उनकी अन्य फसलों को भी लाभ पहुंचा रही है। “कीटों को दूर रखने में मित्र कीट मदद करते हैं,” उन्होंने कहा।§֍:जिला कलेक्टर ने की प्रशंसा§ֆ:जिला कलेक्टर एम. प्रताप ने गाँव का दौरा कर इस नवाचार की सराहना की। उन्होंने कहा, “प्राकृतिक तरीके से बनाई गई यह बाड़ न केवल जंगली सूअरों और कीटों से रक्षा करती है, बल्कि किसान को अतिरिक्त आय भी देती है। यह मॉडल अन्य क्षेत्रों में भी अपनाया जाना चाहिए जहां जंगली सूअरों की समस्या है।”§ֆ:गणेश प्रणव अब अपने खेत पर अन्य किसानों को जैविक बाड़ लगाना सिखा रहे हैं, जिससे यह मॉडल धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र में फैल रहा है।§तिरुवल्लूर ज़िले के कदंबत्तूर ब्लॉक के पुधुपट्टू गाँव के एक किसान गणेश प्रणव ने जंगली सूअरों से फसलों की सुरक्षा के लिए एक अनोखी तीन-स्तरीय जैविक बाड़ (बायो-फेंस) विकसित की है। जंगली सूअरों की समस्या से जूझ रहे इस क्षेत्र में यह जैविक बाड़ न केवल फसलों की सुरक्षा कर रही है, बल्कि किसान के लिए आय का भी एक नया स्रोत बन गई है।

