֍:प्रदर्शनों में शामिल हुए हजारों लोग
§ֆ:गत सप्ताह काठमांडू सहित कई शहरों में हिंदू राष्ट्र समर्थकों ने बड़े प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 2008 में नेपाल को धर्मनिरपेक्ष घोषित करना ऐतिहासिक भूल थी और देश को फिर से हिंदू राष्ट्र बनाया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि वर्तमान सरकार हिंदू बहुल आबादी की भावनाओं की अनदेखी कर रही है।
§֍:राजनीतिक दलों में मतभेद
§ֆ:नेपाल की मौजूदा सरकार और प्रमुख राजनीतिक दल इस मांग का विरोध कर रहे हैं। हालांकि, राष्ट्रवादी दलों और कुछ हिंदू संगठनों ने इस आंदोलन को समर्थन दिया है। नेपाली कांग्रेस और माओवादी दल धर्मनिरपेक्षता को बनाए रखने के पक्ष में हैं, जबकि कुछ छोटे दल संविधान संशोधन की मांग कर रहे हैं।
§֍:धार्मिक नेताओं ने उठाई आवाज
§ֆ:कई हिंदू धार्मिक नेताओं ने कहा है कि नेपाल का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान हिंदू राष्ट्र के साथ जुड़ा हुआ है। उनका तर्क है कि भारत जैसे पड़ोसी देशों में हिंदू धर्म को संरक्षण मिलता है, लेकिन नेपाल में हिंदू अब उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
§֍:सरकार की प्रतिक्रिया
§ֆ:प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है, लेकिन सरकार के सूत्रों का कहना है कि संविधान में बदलाव की कोई योजना नहीं है। हालांकि, आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग नहीं सुनी गई, तो देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
§֍:क्या था 2008 का फैसला?
§ֆ:नेपाल 2008 तक दुनिया का एकमात्र आधिकारिक हिंदू राष्ट्र था, लेकिन तत्कालीन माओवादी सरकार ने इसे धर्मनिरपेक्ष घोषित कर दिया था। तब से हिंदू संगठन लगातार इस फैसले के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं।
अब देखना होगा कि सरकार इस बढ़ते दबाव को कैसे संभालती है और क्या नेपाल फिर से हिंदू राष्ट्र बन पाएगा।
§नेपाल में एक बार फिर हिंदू राष्ट्र की मांग जोर पकड़ रही है। हिंदू राष्ट्र समर्थकों और कई धार्मिक संगठनों ने देश को पुनः हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक बहस भी गर्माई हुई है।

