ֆ:डॉ. गोसल ने इन किसानों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा, “आप ग्रामीण क्षेत्रों के कमजोर वर्गों को कृषि मशीनरी, सामाजिक सहयोग और आर्थिक सहायता देकर उन्हें सशक्त बना रहे हैं। इस कार्य में प्रवासी भारतीयों (NRIs) की भागीदारी इस मॉडल को और भी प्रभावशाली बना रही है।” उन्होंने यह भी कहा कि यदि इन समुदायों को प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग जैसी मूल्यवर्धित गतिविधियों से जोड़ा जाए, तो यह समावेशी आर्थिक विकास का एक प्रभावशाली जरिया बन सकता है।§ֆ:डॉ. रामनदीप सिंह, प्रमुख अन्वेषक, निधि-TBI एवं निदेशक, स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज़ ने किसानों के विज़न की प्रशंसा करते हुए उन्हें स्वावलंबी एग्री-बिजनेस मॉडल अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि उत्पादन, प्रसंस्करण और सीधे विपणन के ज़रिए किसान अपनी आमदनी को बढ़ा सकते हैं। साथ ही, उन्होंने गांव स्तर पर एक साझा खुदरा प्लेटफार्म विकसित करने की भी सलाह दी, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता कम हो और उपभोक्ता तक सीधा लाभ पहुंचे।§ֆ: बल मुकंद शर्मा ने इस संवाद को एक उपयोगी ज्ञान-विनिमय मंच बताया और कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका कृषि-उद्यमिता को सामाजिक पहल के रूप में विकसित करने में बेहद अहम है। गुरिंदर सिंह, CEO, निधि-TBI (DST, भारत सरकार, PAU) ने किसानों को एग्री-बिजनेस माइंडसेट अपनाने और फॉरवर्ड व बैकवर्ड लिंकज को जोड़कर एक मजबूत व स्थायी वैल्यू चेन विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।§ֆ:इस अवसर पर किसानों ने समुदाय-आधारित कृषि व्यवसाय मॉडल पर चर्चा की और देश के सफल ग्रामीण उद्यमों के उदाहरण भी साझा किए, जिन्होंने स्थानीय संसाधनों और सहकारी प्रयासों के बल पर सतत विकास को संभव बनाया है। कार्यक्रम का समापन किसानों के बीच नए उत्साह और उद्देश्य के साथ हुआ और PAU की निधि-TBI टीम ने भविष्य में भी इस तरह की समुदाय-नेतृत्व वाली कृषि नवाचार पहलों को समर्थन देने का आश्वासन दिया।§
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज़ और निधि-TBI (टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर) टीम ने संगरूर जिले के चठ्ठा सेखवां गांव से आए प्रगतिशील किसानों के एक समूह का स्वागत किया। यह किसान ग्रामीण युवाओं के साथ मिलकर समाज-आधारित क्लस्टर मॉडल पर कार्य कर रहे हैं, जो पिछड़े वर्गों को शामिल करते हुए सतत कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है।इस दल ने विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल से मुलाकात की और अपने मॉडल को लेकर विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्राप्त किया। किसानों ने बताया कि इस पहल को पंजाब राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष बल मुकंद शर्मा और उनकी टीम का समर्थन प्राप्त है।

