ֆ:महिलाओं के नेतृत्व में चल रही यह विज्ञान-संलग्न पहल, देश के ग्रामीण क्षेत्रों में मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अत्याधुनिक परीक्षण तकनीक और रीयल-टाइम डिजिटल इंटरफेस से सुसज्जित यह वैन पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के 18,000 से अधिक गांवों में जाकर किसानों को मृदा साक्षरता, टिकाऊ इनपुट और सटीक कृषि के बारे में जागरूक करेगी।§ֆ:डॉ. एमएस भुल्लर, निदेशक, विस्तार शिक्षा (PAU), ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, “यह सिर्फ एक वैन नहीं है, बल्कि मृदा के लिए विज्ञान लाने वाली एक मोबाइल क्रांति है। इससे किसानों को भूमि प्रबंधन, उत्पादन वृद्धि और रासायनिक उपयोग में कमी लाने में मदद मिलेगी।”§ֆ:डॉ. टीएस रियार (मुख्य अनुसंधानकर्ता, PABI-PAU) और डॉ. पूनम ए. सचदेव (सह-अनुसंधानकर्ता, PABI) ने कहा, “यह अभियान यह दर्शाता है कि महिलाएं किस तरह कृषि-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत का भविष्य आकार दे रही हैं। विज्ञान और स्थायित्व के माध्यम से ग्रामीण आजीविका को बदलने का यह एक प्रेरणादायक उदाहरण है।”§ֆ:इस पहल को IISER मोहाली, NSRCEL IIM-बैंगलोर, Nexus UConn, स्टार्टअप पंजाब, SHE-PSCST और PABI-PAU जैसे संस्थानों का सहयोग प्राप्त है। यह मोबाइल वैन खेतों पर ही मृदा परीक्षण कर किसानों को उपयुक्त फसल और उर्वरक संबंधी सुझावों सहित व्यक्तिगत रिपोर्ट प्रदान करेगी, जिससे कृषि और मृदा संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। PAU के विशेषज्ञों ने इसे “भारत के लिए एक मृदा क्रांति” करार दिया है।§
स्थायी कृषि और ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने ‘सॉयल यात्रा 2025’ के तहत भारत की पहली मोबाइल मृदा परीक्षण वैन को राज भवन, चंडीगढ़ से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पहल ग्रीनअफेयर सस्टेनेबल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा चलाई जा रही है, जो पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) और PABI द्वारा समर्थित एक स्टार्टअप है।

