֍:उपयुक्त किस्में:§ֆ:सीधी बुआई के लिए कम से मध्यम अवधि वाली धान की किस्में उपयुक्त हैं।§֍:उपयुक्त मिट्टी:§ֆ:मध्यम से भारी मिट्टी में यह विधि सफल रहती है। हल्की मिट्टी में आयरन की कमी देखने को मिलती है।§֍:बुआई का समय:§ֆ:1 से 15 जून के बीच बुआई करनी चाहिए।§֍:खेत की तैयारी:§ֆ:• दो बार डिस्क हैरो चलाएं, फिर कल्टीवेटर और पाटा लगाकर लेजर लेवलर से समतल करें।
• सिंचाई के बाद ‘तर-वटार’ अवस्था में दोबारा कल्टीवेटर और पाटा लगाएं।
§֍:बीज दर व उपचार:§ֆ:• 8-10 किलो बीज प्रति एकड़ उपयोग करें।
• बीज को 2% पोटैशियम नाइट्रेट घोल में 12 घंटे भिगोकर छाया में सुखाएं और फिर स्प्रिंट 75WS से उपचारित करें।
§֍:बुआई के तरीके:§ֆ:• तर-वटार खेत में ड्रिल से बुआई: खेत को कियारों में बाँटकर हल्की जुताई करें, फिर 2-3 बार पाटा चलाएं और 3-4 सेमी गहराई पर 20 सेमी पंक्ति दूरी से बुआई करें।
• रेज्ड बेड पर बुआई: 67.5 सेमी चौड़े उथले बेड बनाएं और दो कतारें प्रति बेड लगाएं।
• सूखे खेत में बुआई: 2-3 सेमी गहराई में बुआई करें और तुरंत सिंचाई करें।
लकी सीड ड्रिल से बुआई करने पर साथ में खरपतवार नाशी दवा भी डाल सकते हैं जिससे ‘क्रैंड’ बनने की समस्या कम होती है और मिट्टी की नमी बनी रहती है।
§֍:खरपतवार नियंत्रण:§ֆ:• खेत में घास और चौड़ी पत्तियों वाले खरपतवारों की पहचान कर उचित हर्बीसाइड का चयन करें।
• कुछ प्रभावी हर्बीसाइड्स:
o Stomp/Bunker 30EC – 1 लीटर/एकड़
o PEPE 25% SE – घास और पतली/चौड़ी पत्ती दोनों पर असरदार
o Nominee Gold, Ricestar, Almix, Vivaya, Council Activ आदि – 2-4 पत्ती अवस्था में प्रभावी
• छिड़काव के बाद एक सप्ताह तक खेत में नमी बनाए रखें।
§֍:उर्वरक प्रबंधन:§ֆ:• 130 किग्रा यूरिया/एकड़ को 3 बराबर हिस्सों में 4, 6 और 9 सप्ताह बाद डालें।
• गोबर की खाद या हरी खाद (सनै) का प्रयोग करने पर यूरिया की मात्रा कम करें।
§֍:सिंचाई:§ֆ:• तर-वटार खेत में पहली सिंचाई 21 दिन बाद दें; आगे की सिंचाई 5-7 दिन के अंतराल पर करें।
• सूखे खेत में पहली सिंचाई तुरंत और दूसरी 4-5 दिन बाद दें।
§֍:कटाई और मड़ाई:§ֆ:• जब पुआल पीला हो जाए और बालियाँ पक जाएं, तो कटाई करें।
• PAU Super S.M.S. युक्त कंबाइन से कटाई करें ताकि भूसा खेत में समान रूप से बिखरे और जुताई में मदद मिले।
§ֆ:नोट: सीधी बुआई से पानी की 20-30% तक बचत होती है और समय पर गेहूं की बुआई संभव होती है। यह तकनीक पर्यावरण के लिए भी हितकारी है। किसान भाई इस विधि को अपनाकर लाभ उठा सकते हैं।§पंजाब का प्रमुख फसल चक्र चावल-गेहूं है, जिसमें पारंपरिक रूप से धान की रोपाई श्रमसाध्य प्रक्रिया रही है। यह न केवल अधिक पानी की खपत करता है बल्कि श्रमिकों की कमी और लागत में वृद्धि के चलते किसानों के लिए चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में सीधी बुआई (Direct Seeding of Rice – DSR) एक बेहतर विकल्प के रूप में उभर रही है, जो कम श्रम मांगती है, पानी की बचत करती है, लागत कम करती है और समय पर बुआई में सहायक होती है। किसान भाई पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र और फार्म एडवाइजरी सेवा केंद्रों से सलाह लेकर इसे अपनाएं।

