֍:खेती विरासत में, सोच आधुनिक§ֆ:किसान महबूब को अपने पूर्वजों से 62 एकड़ खेती योग्य भूमि विरासत में मिली। बचपन से ही कृषि से जुड़ाव और कुछ नया करने की ललक ने उन्हें हमेशा नई तकनीकों की ओर प्रेरित किया। विभिन्न प्रकार की पारंपरिक फसलों के साथ उन्होंने जब वैज्ञानिक पद्धति से मिर्च की खेती शुरू की, तब से उनकी पहचान एक नवाचारी और सफल किसान के रूप में होने लगी।§֍:मिर्च के साथ पपीता: सहफसली खेती का सफल मॉडल§ֆ:महबूब ने लगभग 1.5 एकड़ भूमि पर मिर्च की खेती शुरू की, जिसमें उन्होंने सहफसली के रूप में पपीते की खेती को शामिल किया। इससे उन्हें एक नहीं, दो फसलों का लाभ मिलने लगा। मिर्च के एक सीजन में वे 4 से 5 बार तुड़ाई करते हैं, और जब तक मिर्च की फसल समाप्त होती है, पपीते की फसल तैयार होने लगती है, जिससे उत्पादन लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है।
उनका मानना है कि, “मिर्च की खेती मेहनत मांगती है, लेकिन यदि सही समय पर देखभाल हो, तो यह किसानों के लिए बहुत लाभकारी फसल है।”
§֍:आजादपुर मंडी से सीधा मुनाफा§ֆ:महबूब अपनी उपज को स्थानीय बाजार में न बेचकर दिल्ली की आजादपुर मंडी में सीधे बेचते हैं। इससे उन्हें मिर्च के बेहतर दाम मिलते हैं और बिचौलियों से बचाव होता है। इतना ही नहीं, उनके खेतों में उगाई गई मिर्च का निर्यात भी होता है, जो उनकी सफलता को और भी विशेष बनाता है।§֍:बागवानी और नवाचार में भी अग्रणी§ֆ:मिर्च और पपीते के अलावा महबूब बागवानी में भी रुचि रखते हैं। उनके खेतों में लीची, नाशपाती, अंजीर जैसे फलदार वृक्ष हैं, जो उन्हें अतिरिक्त आय देते हैं। खास बात यह है कि महबूब ने स्वयं ही एक कृषि यंत्र भी विकसित किया है। इससे खेत में काम करना आसान हो जाता है और समय की बचत होती है।§֍:किसानों के लिए प्रेरणा बने महबूब§ֆ:महबूब की मेहनत और नवाचार ने उन्हें राष्ट्रीय मंच तक पहुँचाया है। वे कई कृषि संगोष्ठियों और प्रदर्शनों में अपनी खेती के मॉडल को प्रस्तुत कर चुके हैं। उनके प्रयासों से प्रेरित होकर पड़ोस के किसान भी मिर्च और पपीते की सहफसली खेती करने लगे हैं और उन्हें भी इसका लाभ मिल रहा है।§֍:नवाचार और मेहनत से ही संभव है प्रगति§ֆ:महबूब का मानना है कि, “खेती से आय दोगुनी ही नहीं, बल्कि कई गुना बढ़ाई जा सकती है, बशर्ते किसान नई तकनीकों को अपनाएं और मेहनत करने में पीछे न हटें।”§֍:टेक्नोलॉजी से जुड़ाव: स्वयं बनाए यंत्र§ֆ:खेती में नवाचार के प्रति उनकी रुचि सिर्फ फसलों तक सीमित नहीं है। महबूब ने स्वयं एक मल्टीपरपज कृषि यंत्र विकसित किया है, जिसमें 12 तरह के अटैचमेंट लगाए जा सकते हैं — जैसे निराई, गुड़ाई, बोआई, स्प्रे आदि। इससे न सिर्फ काम आसान होता है, बल्कि मजदूरी का खर्च भी कम होता है।§ֆ:मोहम्मद महबूब जैसे किसान भारत की नई कृषि क्रांति के प्रतीक हैं। उनकी कहानी यह दर्शाती है कि किस प्रकार एक साधारण किसान वैज्ञानिक सोच, सहफसली तकनीक और बाज़ार समझदारी से अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकता है। यह प्रेरणादायक उदाहरण विशेष रूप से छोटे और मध्यम किसानों के लिए मार्गदर्शक है, जो खेती में नवाचार अपनाकर अपनी आय बढ़ाने का सपना देखते हैं।§۩:Uploads/NewsImages/26-05-2025/iPG2TaIjQ0bfnoEnvM2k.jpg|किसान महबूब कृषि यंत्र के साथ §उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कैराना ब्लॉक स्थित मोहम्मदपुर राई गाँव के किसान महबूब ने परंपरागत खेती में नवाचार जोड़कर यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो खेती भी एक सफल व्यवसाय बन सकती है। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत की बदौलत अपने कृषि क्षेत्र में एक नया मुकाम हासिल किया और खेती को नए आयाम देकर एक सफल किसान बने। आईये जानते है उनकी सफलता की कहानी के बारे में.

