ֆ:कार्यक्रम की प्रमुख अन्वेषक डॉ. लखविंदर कौर ने परियोजना के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला और मृदा, जल एवं तालाब के जल परीक्षण की उपयोगिता के बारे में किसानों को जानकारी दी। उन्होंने किसानों को PAU किसान ऐप, डिजिटल अखबार ‘खेती संदेश’ आदि के उपयोग के बारे में भी बताया। डॉ. हरसिमरन कौर, सहायक प्रोफेसर (मृदा विज्ञान), ने मृदा व जल के नमूने लेने की प्रक्रिया समझाई और किसानों को फसल उत्पादन से पहले परीक्षण करवाने की आवश्यकता पर बल दिया।§ֆ:डॉ. शिवानी गुलेरिया शर्मा, सहायक प्रोफेसर (माइक्रोबायोलॉजी), ने गांव के तालाब के जल को सिंचाई के लिए पुन: उपयोग हेतु परीक्षण की आवश्यकता बताई और बैक्टीरियोलॉजिकल वाटर टेस्टिंग किट के उपयोग का प्रदर्शन किया।इस अवसर पर कृषि अधिकारी डॉ. प्रेमप्रीत सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया और मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की जानकारी दी। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे PAU और कृषि विभाग की सेवाओं व संसाधनों का भरपूर लाभ उठाएं।§ֆ:कार्यक्रम के अंत में किसानों को PAU किचन गार्डनिंग बीज किट वितरित की गईं, ताकि उनके परिवार के सदस्य रसोई बागवानी में रुचि लें और पोषण व स्वच्छता की ओर कदम बढ़ाएं।यह शिविर किसानों को सतत कृषि पद्धतियों से जोड़ने और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग हेतु प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा।§पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, लुधियाना के कृषि महाविद्यालय के डीन के मार्गदर्शन में विस्तार शिक्षा विभाग द्वारा माइक्रोबायोलॉजी और मृदा विज्ञान विभाग के सहयोग से “मृदा और जल परीक्षण” पर एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन जस्सोवाल (जिला लुधियाना) में किया गया। इस कार्यक्रम में लगभग 40 किसानों ने भाग लिया। यह शिविर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, लुधियाना के सहयोग से और ICSSR द्वारा वित्तपोषित परियोजना “वेस्ट टू रिसोर्स: ट्रीटेड वेस्टवॉटर इरिगेशन मैनेजमेंट सिस्टम फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर अंडर वन हेल्थ अप्रोच इन पंजाब” के अंतर्गत आयोजित किया गया।

