֍:ऐतिहासिक दरबार का आयोजन
§ֆ:राजवाड़ा, जो होलकर साम्राज्य की शानदार विरासत का प्रतीक है, में बुधवार को आयोजित इस दरबार में मंत्रिमंडल के सदस्यों, वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। यह आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक और प्रशासनिक परंपराओं को पुनर्जीवित करने की कोशिश के तहत किया गया।
§֍:CM यादव ने अहिल्याबाई को किया याद
§ֆ:मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, “महारानी अहिल्याबाई होलकर न केवल एक वीर शासक थीं, बल्कि उनका प्रशासनिक दृष्टिकोण आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और न्यायप्रिय शासन की मिसाल कायम की।”
§֍:राजवाड़ा का ऐतिहासिक महत्व
§ֆ:राजवाड़ा इंदौर के होलकर शासकों का प्रमुख केंद्र था, जिसे 18वीं शताब्दी में बनवाया गया था। यहां पहले भी दरबार लगते थे, लेकिन ब्रिटिश काल और उसके बाद यह परंपरा धीरे-धीरे खत्म हो गई। 80 साल बाद इस परंपरा को फिर से शुरू करने का फैसला सरकार की ऐतिहासिक विरासत को बढ़ावा देने की कोशिश मानी जा रही है।
§֍:लोक कलाकारों ने किया मनोरंजन
§ֆ:इस दौरान स्थानीय लोक कलाकारों ने मालवा की संस्कृति को दर्शाते हुए गीत-संगीत और नृत्य पेश किए। सरकार ने इस आयोजन को प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ते हुए इसे एक बड़े उत्सव का रूप दिया।
§֍:विपक्ष की प्रतिक्रिया
§ֆ:हालांकि, विपक्षी दलों ने इस आयोजन को ‘छवि निर्माण का प्रयास’ बताया है। कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने कहा, “सरकार को ऐतिहासिक प्रतीकों का इस्तेमाल करने से पहले जनता के विकास पर ध्यान देना चाहिए।”
सरकार की ओर से इस आयोजन को प्रदेश की गौरवशाली परंपरा से जोड़कर देखा जा रहा है। आने वाले समय में और भी ऐसे आयोजन किए जाने की संभावना है।
§मध्य प्रदेश सरकार ने लगभग 80 साल बाद इंदौर स्थित ऐतिहासिक राजवाड़ा परिसर में ‘दरबार’ का आयोजन किया। इस खास मौके पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने होलकर राजवंश की प्रसिद्ध शासक महारानी अहिल्याबाई होलकर को याद करते हुए उन्हें ‘आदर्श शासक’ बताया।

