ֆ:मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करें और इसके लिए पंचायत स्तर पर शिविरों का आयोजन किया जाए ताकि अधिक से अधिक किसान इस पद्धति को अपनाएं। उन्होंने प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के पंजीकरण और प्रमाणन की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। राज्य सरकार ने यह भी घोषणा की है कि प्राकृतिक विधि से उत्पादित मक्की को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा। इस वर्ष किसानों से मक्की की खरीद 60 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से की जा रही है। इससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा और वे रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित होंगे।§ֆ:किसानों को भंडारण की सुविधा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने विभिन्न जिलों में सीए स्टोर (कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर स्टोर) स्थापित करने की योजना पर तेजी से कार्य आरंभ कर दिया है। शिमला, कांगड़ा, सोलन, मंडी और किन्नौर जिलों में इन स्टोर्स का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है, जिनके लिए कुल 330 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इन स्टोर्स की स्थापना से किसानों और बागवानों को अपनी उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की सुविधा मिलेगी, जिससे उन्हें बाजार में बेहतर दाम मिल सकेंगे।§ֆ:प्राकृतिक खेती को और अधिक मजबूती देने के लिए राज्य में आदर्श फार्म स्थापित किए जा रहे हैं। कांगड़ा जिले में भट्टू फार्म, सिरमौर में भगाणी फार्म और सोलन में बेरटीबोच फार्म जैसे केंद्र पहले ही विकसित किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि भविष्य में राज्य के अन्य हिस्सों में भी इस तरह के और फार्म तैयार किए जाएंगे, जो न केवल मॉडल फार्म होंगे बल्कि प्रशिक्षण और अनुसंधान के केंद्र भी बनेंगे।§ֆ:इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने 1010 करोड़ रुपए की लागत से चल रही जाइका परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा की। यह परियोजना हिमाचल प्रदेश के सभी 12 जिलों में लागू की जा रही है और इसका उद्देश्य किसानों को तकनीकी सहायता प्रदान करना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना और कृषि उत्पादन को बढ़ाना है।राज्य सरकार की ये पहलें दर्शाती हैं कि हिमाचल प्रदेश अब रासायनिक खेती से हटकर प्राकृतिक और टिकाऊ खेती की ओर अग्रसर हो रहा है, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी और आने वाले समय में प्रदेश की कृषि व्यवस्था और भी सशक्त बनेगी।§हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती को नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हाल ही में सचिवालय में आयोजित कृषि विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राकृतिक खेती को प्राथमिकता पर रखते हुए किसानों तक इसकी उपयोगिता और लाभों की जानकारी पहुंचाई जाए। उन्होंने कहा कि यह पद्धति न केवल खेती को टिकाऊ बनाएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी।

