ֆ:अमेरिकी अधिकारियों ने विशेष रूप से PPQ203 फॉर्म में त्रुटि को कारण बताया है, जो एक अनिवार्य प्रमाणपत्र होता है और केवल अमेरिकी अधिकारी ही भारत में जारी करते हैं। निर्यातकों का आरोप है कि इस गलती की जिम्मेदारी रेडिएशन सुविधा केंद्र की है, न कि वे स्वयं की। एक निर्यातक ने कहा, “हमारी गलती नहीं है, फिर भी हमें इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है।”
§ֆ:इन खेपों को या तो भारत वापस भेजने या नष्ट करने के विकल्प दिए गए थे, लेकिन आम की जल्दी खराब होने वाली प्रकृति और वापस भेजने की लागत को देखते हुए निर्यातकों ने इन्हें नष्ट करना बेहतर समझा। इस कारण करीब 5 लाख डॉलर (लगभग 4.2 करोड़ रुपये) का भारी नुकसान हुआ है। USDA ने स्पष्ट किया है कि गलत तरीके से जारी PPQ203 फॉर्म के कारण अमेरिका की सीमा सुरक्षा विभाग ने खेप की एंट्री से इनकार किया है और इस मामले में अमेरिकी सरकार कोई जिम्मेदारी नहीं लेगी।
§ֆ:इस पूरे विवाद पर APEDA ने कहा है कि यह मामला महाराष्ट्र राज्य कृषि विपणन मंडल (MSAMB) के वाशी केंद्र से जुड़ा है, जो USDA की मान्यता प्राप्त संस्था है। इसलिए जरूरी जानकारी वहीं से प्राप्त करनी चाहिए। यह घटना भारत के लिए चिंताजनक है क्योंकि अमेरिका सबसे बड़ा आम निर्यातक बाजार है। रेडिएशन प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी दस्तावेजों की गलतियों के कारण खेपों का खारिज होना न केवल निर्यातकों के लिए आर्थिक नुकसान है, बल्कि यह प्रबंधन और प्रक्रिया में खामियों को भी उजागर करता है। अब यह देखने वाली बात होगी कि सरकार और संबंधित एजेंसियां इस मुद्दे पर क्या कार्रवाई करती हैं।§भारत से अमेरिका भेजे गए करीब 15 शिपमेंट आमों को अमेरिकी अधिकारियों ने खारिज कर दिया है। ये आम मुंबई के नवी मुंबई में वाशी केंद्र पर USDA की निगरानी में रेडिएशन ट्रीटमेंट के बाद एयर कार्गो के जरिए अमेरिका भेजे गए थे। रेडिएशन प्रक्रिया कीटों को खत्म करने और आम की ताजगी बनाए रखने के लिए अनिवार्य होती है। लेकिन अमेरिका के लॉस एंजेलिस, सैन फ्रांसिस्को और अटलांटा एयरपोर्ट पर इन खेपों को दस्तावेजों में खामियों के चलते स्वीकार नहीं किया गया।

