֍:किसानों को मिलेगा अस्थायी भूमि अधिकार§ֆ:बैठक में किसानों की समस्याओं पर गंभीर मंथन के बाद यह तय किया गया कि जिन किसानों के पास ज़मीन के वैध कागज़ात नहीं हैं, उन्हें ‘टेंपररी सेटलमेंट’ के जरिए अस्थायी रूप से भूमि उपयोग का अधिकार प्रदान किया जाएगा। यह निर्णय भूमि सुधार, पर्यावरण, वन, और जलवायु परिवर्तन विभागों के उच्चाधिकारियों की मौजूदगी में लिया गया, जिसमें भूमि सुधार मंत्री संजय सरावगी और पर्यावरण मंत्री डॉ. सुनील कुमार भी शामिल थे।
§֍:नई नीति के तहत पात्रता और प्रक्रिया होगी तय§ֆ:सरकार एक उच्च स्तरीय नीति तैयार करेगी, जिसके तहत यह तय किया जाएगा कि कौन-कौन से किसान इस योजना के पात्र होंगे। इसका उद्देश्य है कि पारंपरिक और अनौपचारिक तरीके से खेती करने वाले कृषकों को भी सरकारी सहायता, बीज, उर्वरक, सिंचाई सुविधा और बीमा जैसी योजनाओं से जोड़ा जा सके।
§֍:नीलगाय संकट पर भी सख्त रवैया§ֆ:बैठक में खेती को नुकसान पहुंचा रही नीलगाय (स्थानीय नाम ‘घोड़परास’) की समस्या पर भी चर्चा हुई। जिन जिलों में इनकी संख्या अधिक है, वहां प्रभावित किसान आवेदन देकर जानकारी देंगे। जिला पंचायती राज पदाधिकारी, वन प्रमंडल अधिकारी और संबंधित पंचायत के मुखिया की सिफारिश पर नियंत्रण की कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकतानुसार शूटरों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी, ताकि फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।
§֍: किसानों की आजीविका सर्वोपरि§ֆ:उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी हाल में किसानों की आजीविका प्रभावित नहीं होनी चाहिए। समय रहते कारगर उपाय किए जाएं, जिससे फसल उत्पादन पर नकारात्मक असर न पड़े।§बिहार सरकार ने राज्य के लाखों भूमिहीन और बटाईदार किसानों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। वर्षों से टोपोलैंड (पारंपरिक गैर-मापी भूमि), असर्वेक्षित क्षेत्रों और दियारा क्षेत्रों में खेती कर रहे किसानों को अब सरकारी योजनाओं और अनुदानों का लाभ मिल सकेगा। यह निर्णय हाल ही में उप मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री विजय सिन्हा की अध्यक्षता में हुई अंतर-विभागीय बैठक में लिया गया।

