ֆ: ड्रोन से छिड़काव की यह योजना राज्य के सभी 38 जिलों में लागू की जाएगी, जिससे कम समय में अधिक क्षेत्रफल में छिड़काव सुनिश्चित होगा।
डिप्टी सीएम एवं कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि इससे खेती के परंपरागत तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।
ड्रोन तकनीक से समय और लागत दोनों की बचत होती है। एक ड्रोन 10–12 मिनट में 1 एकड़ भूमि पर छिड़काव कर सकता है।
ड्रोन की एक उड़ान में 10 लीटर कीटनाशी/उर्वरक ले जाया जा सकता है, जिससे छिड़काव अधिक प्रभावी बनता है।
§ֆ: 2024-25 में राज्य में 27,666 एकड़ में ड्रोन से छिड़काव किया गया था।
2025-26 में यह लक्ष्य 56,050 एकड़ तय किया गया है।§֍:अनुदान की व्यवस्था:
§ֆ:किसानों को प्रति एकड़ अधिकतम ₹240 या छिड़काव शुल्क का 50% अनुदान मिलेगा।
एक किसान अधिकतम 15 एकड़ भूमि पर दो बार अनुदान का लाभ उठा सकता है।
§֍: प्रयोग में आने वाले उर्वरक:§ֆ:एनपीके कंसोर्टिया, नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, सूक्ष्म पोषक तत्व आदि का छिड़काव ड्रोन से किया जाएगा, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादकता दोनों में वृद्धि होगी।
§֍:पर्यावरण संरक्षण और स्मार्ट खेती की दिशा में कदम §ֆ:ड्रोन के इस्तेमाल से समय, श्रम, पानी और कीटनाशी की बचत होती है।
इससे पर्यावरणीय प्रभाव कम होता है और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलता है।
कृषि मंत्री के अनुसार, यह योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ तकनीकी रूप से सक्षम भी बनाएगी। यह प्रयास स्मार्ट एग्रीकल्चर और पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
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खेती को लाभकारी बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से बिहार सरकार कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इस कड़ी में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए एक नई योजना को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत ड्रोन तकनीक से फसलों पर कीटनाशक एवं तरल उर्वरक का छिड़काव किया जाएगा।

