ֆ:संयुक्त निदेशक शंकरलाल मीणा ने जानकारी दी कि भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए इस बार किसानों को ढैंचा फसल के बीज बिना किसी शुल्क के दिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि रासायनिक खाद, कीटनाशक और खरपतवार नाशक दवाओं के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता घट रही है, जिससे उत्पादन पर असर पड़ता है और किसानों को आर्थिक नुकसान होता है। साथ ही इससे मानव स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
§֍:ढैंचा फसल के प्रमुख लाभ:§ֆ:• दलहनी फसल होने के कारण यह भूमि की उर्वरता को स्वाभाविक रूप से बढ़ाती है।
• खेत में यूरिया की आवश्यकता कम हो जाती है।
• जीवांश पदार्थ की मात्रा बढ़ती है जिससे फसल का उत्पादन बेहतर होता है।
• हरी खाद के रूप में उपयोग करने पर भूमि लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है।
§֍:कैसे करें ढैंचा का उपयोग:§ֆ:फसल को 40-45 दिन की अवस्था में, फूल आने के समय, खेत में रोटावेटर से जुताई कर मिट्टी में मिला देना चाहिए। इससे हरी खाद बनती है जो कार्बनिक तत्वों से भरपूर होती है।
§֍:पात्रता और आवेदन प्रक्रिया:§ֆ:बीज वितरण प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी और इसके लिए किसान को राजकिशन पोर्टल के माध्यम से जन आधार कार्ड व OTP के जरिये पंजीकरण करना होगा।
§֍:पात्रता शर्तें:§ֆ:• कम से कम 0.5 हेक्टेयर भूमि का होना जरूरी है।
• यदि किसान के नाम पर भूमि नहीं है, तो नौशल शेयर प्रमाण पत्र के माध्यम से भी आवेदन किया जा सकता है।
• एफआरए पट्टा धारक एवं मंदिर माफी भूमि पर खेती करने वाले किसानों को भी पटवारी या तहसीलदार से सत्यापित दस्तावेज देने पर लाभ मिलेगा।
• एक जन आधार कार्ड पर केवल एक किसान को लाभ मिलेगा।
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राजस्थान के किसानों के लिए एक खुशखबरी है। कृषि विभाग किसानों को जैविक खेती की ओर प्रेरित करने के लिए खरीफ सीजन में ढैंचा फसल के बीज मिनीकिट मुफ्त में वितरित कर रहा है। इसका मकसद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना और रासायनिक उर्वरकों की निर्भरता को कम करना है।

