ֆ:इस योजना की जानकारी देते हुए राज्य के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि ढैंचा एक प्राकृतिक खाद के रूप में कार्य करता है, जो मिट्टी की नमी बनाए रखने, उर्वरता बढ़ाने और उत्पादन लागत कम करने में सहायक होता है। उन्होंने बताया कि यह योजना प्रदेश भर में पहली बार लागू की जा रही है और इससे हजारों किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
§ֆ:ढैंचा एक फलीदार फसल है जिसे कटाई से पहले मिट्टी में जोतकर जैविक खाद में बदला जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह फसल नाइट्रोजन स्थिरीकरण में अहम भूमिका निभाती है और मिट्टी में नाइट्रोजन की पूर्ति करती है, जिससे यूरिया जैसी रासायनिक खादों पर निर्भरता कम हो जाती है। इससे न केवल मिट्टी की संरचना बेहतर होती है बल्कि फसलों की दीर्घकालिक उत्पादकता भी बनी रहती है।
§ֆ:कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को अपनी ढैंचा फसल की फोटो “मेरी फसल मेरा ब्यौरा” पोर्टल पर समय रहते अपलोड करनी होगी। यदि किसान यह प्रक्रिया पूरी नहीं करते, तो उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
§ֆ:सरकार ने राज्य के 22 जिलों में 4 लाख एकड़ भूमि पर फसल विविधिकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें ढैंचा की खेती को प्रमुखता दी गई है। इस प्रयास से लगभग 3 लाख किसानों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। यह योजना न केवल मिट्टी की सेहत को सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि किसानों को पर्यावरण-अनुकूल खेती की ओर भी प्रोत्साहित करेगी।
§ֆ:अंत में कृषि मंत्री ने राज्य के किसानों से आग्रह किया कि वे सरकार की योजनाओं का पूरा लाभ उठाएं और ढैंचा जैसी फसलों को अपनाकर हरित क्रांति में भागीदार बनें। सरकार का उद्देश्य किसानों को डिजिटल सिस्टम से जोड़ना और योजनाओं को पारदर्शी व सरल तरीके से उनके पास पहुंचाना है, ताकि कृषि क्षेत्र में स्थायी और समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सके।§मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने और रासायनिक खाद पर किसानों की निर्भरता कम करने के उद्देश्य से हरियाणा सरकार ने एक अहम पहल की है। अब राज्य में जो भी किसान अपने खेतों में हरी खाद के रूप में ढैंचा की खेती करेंगे, उन्हें सरकार की ओर से 1000 रुपये प्रति एकड़ की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली के माध्यम से किसानों के बैंक खातों में सीधे भेजी जाएगी।

