֍:गेहूं और चावल के स्टॉक में ऐतिहासिक बढ़ोतरी§ֆ:मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संतोष जताते हुए बताया कि देश में चावल और गेहूं का भंडारण बफर मानकों से कहीं अधिक है।
• चावल का स्टॉक: 389.05 लाख मीट्रिक टन (LMT) (बफर मानक: 135.80 एलएमटी)
• गेहूं का स्टॉक: 177.08 एलएमटी (बफर मानक: 74.60 एलएमटी)
• कुल स्टॉक: 566.13 एलएमटी (बफर मानक: 210.40 एलएमटी)
यह उपलब्धि खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता और स्थिरता को दर्शाती है।
§֍:कटाई की स्थिति और फसल उत्पादन§ֆ:बैठक में यह भी बताया गया कि 2 मई 2025 तक गेहूं की कटाई मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और हरियाणा में 100%, पंजाब में 97%, और बिहार में 96% पूरी हो चुकी है। हाल की लू और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक घटनाओं के बावजूद फसल उत्पादन पर कोई गंभीर प्रभाव नहीं पड़ा है।
§֍:दलहनों की खरीद को लेकर निर्देश
§ֆ:कृषि मंत्री ने चना, मसूर, उड़द और अरहर जैसी दलहनी फसलों की सरकारी खरीद को तेज़ करने और एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर खरीदी का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने राज्यों को निर्देश दिए कि एक पारदर्शी और प्रभावी प्रणाली विकसित की जाए जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
§֍:बुआई रकबे में वृद्धि§ֆ:कृषि विभाग ने बताया कि खरीफ फसलों के अंतर्गत बुआई रकबे में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है:
• धान: 3.44 लाख हेक्टेयर
• दलहन: 2.20 लाख हेक्टेयर
• मूंग: 1.70 लाख हेक्टेयर
• उड़द: 0.50 लाख हेक्टेयर
• प्याज: 9.76 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 12.58 लाख हेक्टेयर
• आलू: 19.56 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 20.03 लाख हेक्टेयर
§֍:जलाशयों की स्थिति भी बेहतर§ֆ:देश के 161 प्रमुख जलाशयों में जल संग्रहण पिछले वर्ष की तुलना में 117% और पिछले दस वर्षों के औसत से 114% अधिक है। यह आने वाले समय में फसलों की सिंचाई के लिए राहतकारी संकेत है। इस समीक्षा बैठक में कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी, अतिरिक्त सचिव मनिंदर कौर द्विवेदी, कृषि आयुक्त पी.के. सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। यह समीक्षा बैठक स्पष्ट करती है कि भारत का कृषि क्षेत्र आत्मनिर्भरता, उत्पादकता और किसानों की आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में लगातार सशक्त कदम बढ़ा रहा है।§
भारत के कृषि क्षेत्र में तेजी से प्रगति हो रही है। हाल ही में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में कृषि भवन, नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में इस बात की पुष्टि हुई। बैठक में देश की कृषि उत्पादन, फसलों की बुआई, खरीद व्यवस्था और किसानों को समय पर भुगतान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

