ֆ: पहले चरण में 50 कृषि सखियों को विशेष प्रशिक्षण देकर तैयार किया गया है, जो गांव-गांव जाकर किसानों को प्राकृतिक खेती के फायदे बताएंगी और उन्हें इसके लिए प्रेरित करेंगी। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विश्वेंदु द्विवेदी ने बताया कि खेती में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन अभी तक उन्हें पूरी जानकारी नहीं मिल पाती। कृषि सखियों के माध्यम से यह जानकारी अब सीधे गांवों तक पहुंचेगी।
§ֆ:डॉ. द्विवेदी ने यह भी बताया कि एक देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से किसान घटक जीवामृत, घनजीवामृत और बीजामृत जैसे जैविक खाद तैयार कर सकते हैं, जिनका छिड़काव खेतों में करने से न केवल उत्पादन बढ़ता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती है। साथ ही, खेती की लागत घटती है और अनाज की गुणवत्ता में सुधार होता है। प्राकृतिक खेती के इस अभियान से न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, बल्कि किसानों की आमदनी बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को रसायन मुक्त, स्वास्थ्यवर्धक अनाज प्राप्त होगा। सरकार की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।
§कालीन नगरी भदोही में किसानों का रुझान अब पारंपरिक खेती की बजाय प्राकृतिक खेती की ओर तेजी से बढ़ रहा है। बीते दो वर्षों में जिले के करीब 15 से 20 किसानों ने रासायनिक उर्वरकों को छोड़कर प्राकृतिक विधि से खेती शुरू की है। अब इस पहल को व्यापक स्तर पर पहुंचाने के लिए सरकार ने विशेष योजना बनाई है। जिले में लघु एवं सीमांत किसानों की संख्या ढाई से तीन लाख के बीच है, लेकिन अभी तक बेहद कम किसान ही प्राकृतिक खेती से जुड़े हैं। इस स्थिति को बदलने के लिए अब कृषि सखियों की नियुक्ति की गई है।

