֍:वैज्ञानिक उपलब्धियों की मिसाल§ֆ:डॉ. सुबन्ना अय्यप्पन का जन्म 10 दिसंबर 1955 को कर्नाटक के चामराजनगर ज़िले के येलंदूर में हुआ था। उन्होंने मैंगलुरु से मत्स्य विज्ञान में स्नातक और परास्नातक डिग्रियां प्राप्त कीं और बेंगलुरु स्थित कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि ली। 1978 में उन्होंने केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CIFRI) में अपने करियर की शुरुआत की।
§ֆ:उन्होंने भुवनेश्वर स्थित ‘सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेशवॉटर एक्वाकल्चर’ (CIFA) और मुंबई स्थित ‘सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज एजुकेशन’ (CIFE) के निदेशक के रूप में भी कार्य किया। 2010 में वे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक बने — इस पद पर पहुंचने वाले पहले “गैर-फसल वैज्ञानिक” थे।§֍:भारत में ब्लू रिवोल्यूशन के प्रमुख शिल्पकार§ֆ:डॉ. अय्यप्पन ने भारत में मत्स्य उत्पादन और जलीय कृषि को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके नेतृत्व में देश में ‘ब्लू रिवोल्यूशन’ को बल मिला, जिससे न केवल खाद्य सुरक्षा मजबूत हुई, बल्कि ग्रामीण और तटीय समुदायों को रोजगार और आय के नए साधन मिले। उनके योगदान के लिए उन्हें 2022 में भारत सरकार ने पद्म श्री से सम्मानित किया था।
§֍:संदिग्ध परिस्तिथियों में मिला शव
§ֆ:डॉ. अय्यप्पन नियमित रूप से साईं आश्रम और कावेरी नदी के किनारे ध्यान और एकांत के लिए जाया करते थे। 7 मई को वे घर से निकले लेकिन वापस नहीं लौटे। 10 मई को उनका शव नदी में मिला। पुलिस को पास में उनका स्कूटर और कुछ निजी सामान मिला। फिलहाल मौत की वजह स्पष्ट नहीं है, हालांकि प्रारंभिक जांच आत्महत्या की आशंका जताती है। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है।
§֍:देश ने खोया एक महान वैज्ञानिक
§ֆ:डॉ. अय्यप्पन अपने पीछे पत्नी और दो बेटियां छोड़ गए हैं। वे न केवल एक वैज्ञानिक थे, बल्कि एक दूरदर्शी नेता भी थे, जिनके प्रयासों से भारत वैश्विक जलीय कृषि मानचित्र पर उभरा। उनकी मृत्यु से वैज्ञानिक समुदाय में अपूरणीय क्षति हुई है।भारत हमेशा डॉ. सुबन्ना अय्यप्पन को उनके नवाचार, समर्पण और मछली पालन के क्षेत्र में क्रांतिकारी कार्यों के लिए याद रखेगा।
§ICAR के पूर्व महानिदेशक और भारत के प्रमुख जलीय कृषि वैज्ञानिक और पद्म श्री से सम्मानित डॉ. सुबन्ना अय्यप्पन का शव 10 मई 2025 को कर्नाटक के श्रीरंगपट्टण में कावेरी नदी के पास मिला। वह 7 मई से लापता थे और उनका स्कूटर नदी के किनारे स्थित साईं आश्रम के पास बरामद हुआ था। उनकी मौत की खबर से वैज्ञानिक समुदाय और देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है।भारतीय कृषि उद्योग को उनके निधन से आघात लगा है।

