֍:ड्रोन तकनीक: खेती में नया बदलाव§ֆ:कृषि क्षेत्र में ड्रोन का उपयोग बीज बोने, कीटनाशक छिड़कने और फसलों की निगरानी के लिए किया जा रहा है। इससे समय और श्रम की बचत होती है साथ ही रसायनों का सही मात्रा में उपयोग संभव हो पाया है। केंद्र सरकार ने “ड्रोन शक्ति” योजना के तहत किसानों को सब्सिडी पर ड्रोन उपलब्ध कराए हैं, जिससे इस तकनीक को बढ़ावा मिला है।§֍:AI और IoT: स्मार्ट फार्मिंग का युग§ֆ:आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और IoT के माध्यम से किसान मिट्टी की गुणवत्ता, मौसम की जानकारी और फसलों की स्थिति का रियल-टाइम विश्लेषण कर पा रहे हैं। कंपनियां जैसे “CropIn” और “Ninjacart” AI-आधारित समाधान प्रदान कर रही हैं, जिससे किसानों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलती है।§֍:प्रिसिजन फार्मिंग: संसाधनों का कुशल उपयोग§ֆ:प्रिसिजन फार्मिंग तकनीक के जरिए किसान पानी, उर्वरक और बीज का सटीक इस्तेमाल कर पा रहे हैं। सेंसर और GPS टेक्नोलॉजी की मदद से खेतों की स्थिति का विश्लेषण करके उत्पादन बढ़ाया जा रहा है। इससे पर्यावरण को नुकसान कम होने के साथ-साथ किसानों की लागत भी घटी है।§֍:चुनौतियाँ और भविष्य§ֆ:हालांकि, छोटे किसानों के लिए इन तकनीकों तक पहुँच और उनकी लागत अभी भी एक बड़ी चुनौती है। सरकार और कृषि स्टार्टअप्स को मिलकर सस्ते और सुलभ तकनीकी समाधान विकसित करने की आवश्यकता है।§नई दिल्ली, 10 मई 2025 – भारत का कृषि क्षेत्र पारंपरिक तरीकों से आधुनिक तकनीक की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) और प्रिसिजन फार्मिंग जैसी तकनीकों ने किसानों की उत्पादकता और आय में वृद्धि की है। सरकार और निजी कंपनियों के सहयोग से कृषि क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन तेज हुआ है, जिससे छोटे और मझोले किसानों को भी फायदा हो रहा है।

