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दोनों नेताओं ने बहु-क्षेत्रीय और तकनीकी सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल (बिम्सटेक) समूह के नेताओं की शिखर बैठक के मौके पर मुलाकात की। पिछले साल अगस्त में प्रधानमंत्री शेख हसीना को हटाए जाने के बाद यह उनकी पहली मुलाकात थी।
यूनुस के साथ मोदी की बैठक के बारे में संवाददाताओं को जानकारी देते हुए विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि मोदी ने हिंदुओं सहित बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा से संबंधित भारत की चिंताओं को रेखांकित किया।
मिसरी ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने उम्मीद जताई कि बांग्लादेश सरकार अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार के सभी मामलों की गहन जांच सहित उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
विदेश सचिव ने कहा कि बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी आग्रह किया कि माहौल को खराब करने वाली किसी भी बयानबाजी से बचना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने लोकतांत्रिक, स्थिर, शांतिपूर्ण, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के लिए भारत के समर्थन को दोहराया।
मिसरी ने बैठक के बारे में कहा, “उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत संबंधों के लिए लोगों पर केंद्रित दृष्टिकोण में विश्वास करता है और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे सहयोग पर प्रकाश डाला, जिसने दोनों देशों के लोगों को ठोस लाभ पहुंचाया है। इस भावना से, उन्होंने प्रोफेसर यूनुस को व्यावहारिकता की भावना के आधार पर बांग्लादेश के साथ सकारात्मक और रचनात्मक संबंध बनाने की भारत की इच्छा को रेखांकित किया।”
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने सीमा और कानून के सख्त क्रियान्वयन तथा सीमा सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए विशेष रूप से रात में अवैध सीमा पार करने पर अंकुश लगाने के बारे में भी बात की।
यह पूछे जाने पर कि क्या यूनुस ने हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा उठाया, मिसरी ने सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर फिलहाल बात करना उचित नहीं है और मंत्रालय पहले ही कह चुका है कि उसे बांग्लादेश से अनुरोध प्राप्त हुआ है।
§प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के साथ अपनी बैठक में हिंदुओं सहित अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर भारत की चिंताओं को रेखांकित किया और उम्मीद जताई कि बांग्लादेशी सरकार उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, जिसमें उनके खिलाफ अत्याचार के मामलों की गहन जांच भी शामिल है।

