֍:क्या हैं कीमतें?§ֆ:2 अप्रैल को महारष्ट्र में सिथित नासिक जिले की लासगांव मंडी में ग्रीष्मकालीन प्याज की कीमतें 700 रुपये प्रति क्विंटल से 1602 रुपये प्रति क्विंटल तक थी. इसकी औसतन प्याज की कीमत 1250 रुपये प्रति क्विंटल तक रही. मार्च के अंत में इसकी कीमत 1500 रुपये तक पहुंच रही थी. इसी कमी के कारण किसानों को काफी नुकसान हुआ. §֍:देरी के कारण हुआ नुकसान§ֆ:निर्यात शुल्क को हटाने में हुई देरी के कारण किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. खेतों में पड़ी प्याज की फसल बिक नहीं रही है. ऐसे में किसानों को मजबूरी में कम दामों में फसल को बेचना पड़ रहा है. वहीं, अब विदेशों में प्याज का निर्यात बढ़ाने के लिए सरकार से प्याज निर्यात पर सब्सिडी की मांग की जा रही है. इससे उनकी फसल को सही दाम मिलेगा और नुकसान की भरपाई हो सकेगी.§֍:किसान संगठनों की चेतावनी§ֆ:किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि सरकार ने अगर जल्द प्याद के दामों में बढ़ोतरी नहीं की तो महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक और किसान संघ राज्यभर में विरोध प्रदर्शन करेंगे. संगठन के संस्थापक अध्यक्ष भरत दिघोले ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है और सरकार से शीघ्र समाधान की मांग की है. इस स्थिति में सरकार को चाहिए कि वह जल्दी से जल्दी प्याज निर्यात को बढ़ावा दे और किसानों के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करे. अन्यथा, आने वाले समय में किसानों का और भी अधिक नुकसान हो सकता है, और इससे प्याज उत्पादक क्षेत्रों में गुस्सा फैल सकता है.§केंद्र सरकार ने प्याज के 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क को हटाने में देरी होने से किसानों को भारी नुकसान हुआ है. 22 मार्च को सरकार ने निर्यात शुल्क हटाने का निर्णय लिया था, लेकिन इस फैसले को 1 अप्रैल से शुरु किया गया. इस देरी का सीधा असर किसानों पर पड़ा और अब उन्हें अपनी फसल बाजार समितियों में बहुत कम दाम में बेचनी पड़ रही है.

