֍:धान के लिए जरूरी है ढैंचा§ֆ:एक्सपर्ट्स के अनुसार, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए हरी खाद के तौर पर ढैंचा की बहुंत मांग है. जिले में किसान करीब 5.5 लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती करते हैं. इसमें से 1.5 लाख हेक्टेयर से ज्या्दा की जमीन पर धान की खेती होती है. धान के लिए उपजाऊ मिट्टी की जरूरत होती है. इस वजह से कई किसान धान की रोपाई से 30 से 45 दिन पहले ढैंचा बोते हैं. §ֆ:पिछले साल कृषि विभाग ने बीज विकास निगम से 400 क्विंटल ढैंचा के बीज मांगे थे. लेकिन सप्लााई पूरी नहीं थी. इसके कारण कुछ किसानों को प्राइवेट वेंडर्स से ऊंचे दामों पर बीज खरीदना पड़ा. सीमित या कम उपलब्धता के बावजूद, ढैंचा मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और रासायनिक उर्वरकों की जरूरतों को कम करने के लिए जरूरी है. बताया जा रहा है कि ये बीज अप्रैल के महीने में उपलब्ध हो जाएंगे. §֍:कितनी फायदेमंद है ये खाद§ֆ:हरी खाद, मिट्टी की हेल्थ और फसल उत्पादन के लिए कई तरह से फायदेमंद है. यह मिट्टी में पीएच लेवल को सुधारती है और उसकी पानी सोखने की क्षमता को भी बढ़ाती है. साथ ही पोषक तत्वों की उपलब्धता में वृद्धि होती है और इसकी वजह से खरपतवार भी फसलों से दूर रहती हैं.§उत्तर प्रदेश में किसानों को हरी खाद उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग ने बड़ी पहल की है. इस साल किसानों को खाद के तौर पर ढैंचा के बीज दिए जाने वाले हैं. सीतापुर जिलो विभाग की ओर से 300 क्विंटल बीज आवंटित किए जा चुके हैं. बीज विकास निगम की तरफ से कृषि विभाग को बीज उपलब्ध कराए जाएंगे. ब्लॉक स्तर पर कृषि बीज भंडारों के माध्यम से इनका वितरण किसानों को किया जाएगा.

