֍:एसकेएम ने कही ये बात§ֆ:एसकेएम ने एक प्रेस रिलीज जारी कर लिखा, भगवंत मान सरकार द्वारा शंभू और खनौरी बॉर्डर पर किसान आंदोलनों पर ‘दमन’ और आंदोलनकारी किसानों की वास्तविक, लंबित मांगों को हल करने में विफलता के लिए नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना की. लाभकारी मूल्य, ऋण माफी और एनपीएफएएम को निरस्त करने – जिस पर पंजाब विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित किया – की किसानों की मांग का समर्थन करने के बजाय किसानों के संघर्ष को दबाने के लिए पुलिस को उतारने का भगवंत मान सरकार का निर्णय राजनीतिक रूप से गलत था, जिसका उद्देश्य कॉर्पोरेट हितों को फायदा पहुंचना था और आम आदमी पार्टी को इसके लिए भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.§ֆ:एसकेएम ने कहा, किसानों की एकता किसी भी संघर्ष और आंदोलन की सफलता की आधारशिला है. एसकेएम ने पंजाब के मुख्यमंत्री से शासन की लोकतांत्रिक प्रथाओं का पालन करने, बुलडोजर राज को समाप्त करने और लोगों के शांतिपूर्ण, बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन न करने की मांग की. §֍:क्या हैं मांगे?§ֆ:एसकेएम द्वारा कहा गया कि कृषि के निगमीकरण के खिलाफ, कृषि उपज के लाभकारी मूल्य, कर्ज से मुक्ति और बिजली के निजीकरण को रोकने आदि के लिए किसानों का संघर्ष पूरे देश में तेज किया जाएगा. 29 मार्च 2025 को होने वाली एसकेएम राष्ट्रीय समन्वय समिति की बैठक इस संबंध में तत्काल भविष्य की कार्ययोजना तय करेगी.§संयुक्त किसान मोर्चा ने पंजाब में गिरफ्तार और जेल में बंद किसान नेताओं को रिहा करने की मांग को लेकर 28 मार्च 2025 को ‘दमन विरोधी’ दिवस पर पूरे भारत में विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले हजारों किसानों को बधाई दी. पूरे भारत में विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें महिलाओं सहित बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया. एसकेएम ने केएमएम और एसकेएम (एनपी) के सभी जेल में बंद किसान नेताओं की रिहाई का स्वागत किया और इसे किसान आंदोलन की एकता और बड़े पैमाने पर देशव्यापी किसान विरोध की आंशिक जीत माना.

