֍:कितना है लक्ष्य?§ֆ:हरियाणा कृषि विभाग की ओर से कुरुक्षेत्र, भिवानी, पलवल और सिरसा को सबसे अधिक 8,000 एकड़ का लक्ष्य दिया गया है, इसके बाद फतेहाबाद, जींद और रेवाड़ी को 7,000 एकड़. करनाल और सोनीपत को 6,000 एकड़ और कैथल और हिसार को 5,000 एकड़ का का लक्ष्य दिया गया है. अन्य जिलों को 1,000 से 4,500 एकड़ तक का लक्ष्य दिया गया है. §֍:कितनी मिलेगी सब्सिडी?§ֆ:कृषि विभाग ने एक अधिकारी ने इस पहल के दोहरे लाभ पर जोर दिया और बताया कि मूंग की खेती से मिट्टी की सेहत में सुधार होता है. इसी के साथ मूंग किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत भी है. ऐसे में मूंग की खेती करने वाले इच्छुक किसान 26 मार्च से 20 अप्रैल तक विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. §֍:क्या मिलेगा लाभ?§ֆ: कुरुक्षेत्र के कृषि उपनिदेशक डॉ. करम चंद ने ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती के लाभों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा, “यह फसल मिट्टी की उर्वरता के लिए अच्छी है. यह कम अवधि की फसल है, जिससे किसान गेहूं के बाद और धान की बुवाई से पहले एक अतिरिक्त फसल ले सकते हैं. किसान प्रति एकड़ 4 से 5 क्विंटल उपज प्राप्त कर सकते हैं और दालों की बाजार में उच्च मांग है, जिससे अतिरिक्त आय कमाई जा सकती है.“§ֆ:इसी के साथ बताया गया कि जो किसान बीज ले लेते हैं, लेकिन खेती नहीं करते, उन्हें 75 फीसदी सब्सिडी वापस करनी होगी. अगर वे ऐसा नहीं करते, तो उन्हें अगले दो फसल सत्रों के लिए कृषि विभाग की ओर से मिलने वाले लाभ से वंचित कर दिया जाएगा. §हरियाणा के कई जिलों में रबी फसलों की कटाई शुरु हो गई है. इसके चलते मूंग की खेती के लिए कृषि और किसान कल्याण विभाग ने 2025-26 सीजन में 1 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती करने का लक्ष्य रखा है. इसके तहत सरकार अलग-अलग जिलों में किसानों को 75 फीसदी सब्सिडी पर 10 हजार क्विंटल ग्रीष्मकालीन मूंग के बीज उलब्ध कराएगी.

