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संशोधित आदेश आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने के तुरंत बाद प्रभावी हो जाता है।
इस संशोधन से बायोस्टिमुलेंट के निर्माताओं और आयातकों को लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि इससे उन्हें पंजीकरण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा, साथ ही इन उत्पादों की विनियामक निगरानी भी जारी रहेगी।
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कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने उर्वरक (अकार्बनिक, कार्बनिक या मिश्रित) (नियंत्रण) दूसरा संशोधन आदेश, 2025 जारी किया है, जो उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 में एक महत्वपूर्ण संशोधन प्रस्तुत करता है। यह संशोधन मुख्य रूप से बायोस्टिमुलेंट के विनिर्माण और आयात को प्रभावित करता है, जिसके लिए कोई विशिष्ट मानक निर्धारित नहीं किए गए हैं। 17 मार्च, 2025 की अधिसूचना (एस.ओ. 1236 (ई)) के अनुसार, इस आदेश के प्रकाशन की तिथि तक ऐसे बायोस्टिमुलेंट के विनिर्माण या आयात में लगी कोई भी इकाई तीन महीने की अवधि के लिए अपना परिचालन जारी रख सकती है, बशर्ते वे खंड 20सी के उप-खंड (5) के तहत अनंतिम पंजीकरण के लिए आवेदन प्रस्तुत करें। यह सुनिश्चित करता है कि वर्तमान में बायोस्टिमुलेंट क्षेत्र में लगे व्यवसायों को नियामक आवश्यकताओं का अनुपालन करने के लिए अतिरिक्त समय मिले। इसके अतिरिक्त, संशोधन फॉर्म जी-3 प्रावधानों के अनुपालन के लिए समयसीमा बढ़ाता है। 22 फरवरी, 2025 की पिछली समयसीमा को अब बढ़ाकर 16 जून, 2025 कर दिया गया है। इस विस्तार से हितधारकों को विनियामक अपेक्षाओं के साथ तालमेल बिठाने के लिए अधिक समय मिलता है।

