֍:सांसद ने कही ये बात§ֆ:राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान संजय कुमार झा ने बताया कि मखाना के उत्पादन और प्रोसेसिंग से बिहार के 5 लाख से अधिक परिवार जुड़े हुए हैं, जिनमें से ज्यादातर मल्लाह, सहनी और अति पिछड़ा समाज से आते हैं. अगर मखाना की खरीदारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर होती है, तो इन परिवारों के जीवन में खुशहाली आ सकती है. उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि सहकारी संस्थाओं के माध्यम से मखाना की खरीदारी की जाए. साथ ही, मखाना की खेती को फसल बीमा मिलने की मांग की, ताकि किसानों को वित्तीय सुरक्षा मिल सके और वे नुकसान के जोखिम से बच सकें.§֍:बिचौलियों पर लगेगी लगाम§ֆ:पैक्स अध्यक्ष धीरेंद्र कुमार ने कहा कि अगर सरकार मखाने की खरीदारी खुद करे तो बिचौलियों पर अंकुश लगेगा. किसान और छोटे व्यापारी अक्सर मखाना के अस्थिर दामों को लेकर चिंतित रहते हैं, लेकिन एमएसपी तय होने से यह समस्या खत्म हो जाएगी. सरकार को मखाना की खेती में आने वाली लागत को ध्यान में रखते हुए उचित मूल्य तय करना होगा. किसानों को उम्मीद है कि केंद्र सरकार जल्द ही इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लेगी.§बिहार की मुख्य फसल मखाना की लगातार मांग बढ़ती जा रही है. बिहार क मखाना किसानों को अपनी फसल का अच्छा दाम मिला, जिससे वे कापी खुश थे. लेकिन हर समय अच्छा दाम मिले इसे लेकर केंद्र ने मखाना के लिए एमएसपी तय करने की मांग की जा रही है. इसे लेकर जनता दल यूनाइटेड के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभ सांसद संजय कुमार झा ने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान मखाना खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर करने की मांग उठाई. वहीं किसान भी चाहते हैं कि मखाने की खरीदारी सरकारी दर पर हो, क्योंकि हर साल व्यापारी ही मखाना के दाम तय करते हैं, जिससे किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता.

