֍:मॉनसून से पहले बारिश§ֆ: ‘बिजनेसलाइन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि ट्रोपिकल (उष्णकटिबंधीय) प्रशांत क्षेत्र वसंत ऋतु और बाद में गर्मियों में ‘तटस्थ’ रहता है यानी न तो ला नीना और न ही अल नीनो का असर होता है. इसलिए स्थानीय जलवायु चालक ही मॉनसून कैसा रहेगा, यह तय करेंगे. रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपियन मौसम एजेंसी ने प्री-मॉनसून बारिश को लेकर भी अपडेट दिया है. अप्रैल, मई और जून महीने प्री-मॉनसून सीजन में आते हैं.§֍:इन राज्यों में मॉनसून फुल पॉवर पर दिखेगा§ֆ:मौसम एजेंसी के अनुसार, भारत में मई, जून और जुलाई में बंगाल की खाड़ी से एंट्री करने वाला मॉनसून बहुत प्रमुखता से एक्टिव रहेगा और जून से अगस्त तक बना रहेगा, जिसके चलते मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में भारी बारिश की संभावना बन रही है. वहीं, इस समय तक यह मॉनसून पूरे देश में फैल चुका होगा, जिसके चलते दक्षिणी गुजरात और उत्तर-पश्चिमी भारत के राज्योंल में भारी बारिश होगी और राजस्थान के कुछ इलाकों में सामान्य से ज्यानदा बारिश होने की संभावना रहेगी. रिपोर्ट के मुताबिक, जून से अगस्त के दौरान पश्चिमी तट, मध्य भारत और पश्चिम भारत (गुजरात और सौराष्ट्र सहित) में भारी बारिश के साथ समान बारिश होने की उम्मीयद है. राजस्थान और उत्तर-पश्चिम भारत में उत्तर प्रदेश को छोड़कर शेष हिस्सों् में सामान्य से ज्यानदा बारिश हो सकती है.§भारत के मॉनसून स्थिति पर देश-दुनिया की नजर रहती है. अब कई एजेंसियों ने भारतीय मौसम को लेकर पूर्वानुमानजारी किए हैं. इस क्रम में अब यूरोपियन सेंटर फॉर मीडिय रेंज वेदर फोरकास्ट ने मार्च के अपने दीर्घ अवधि मौसम पूर्वानुमान में इस साल के अंत में भारत के लिए बढ़िया मॉनसून की संभावना जताई है. इसको लेकर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग भी पूर्वानुमान जारी कर सकता है.

